शिक्षा की ताकत से गढ़ेगा विकसित भारत, भारतीय ज्ञान परंपरा से तकनीक तक मंथन

ज्ञान सभा मेरठ-2026 में कौशल, रोजगार, एआई, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

मेरठ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र) एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ज्ञान सभा मेरठ-2026 के समापन अवसर पर विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर व्यापक मंथन हुआ। शिक्षाविदों, कुलपतियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास, रोजगारपरक शिक्षा, तकनीक, नवाचार, महिला सहभागिता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर विचार रखे।

मुख्य वक्ता एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक रूप से मजबूत देश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक रूप से भी सशक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को सही दिशा देने के लिए भारतीयता से प्रेरित शिक्षा व्यवस्था जरूरी है और भारतीय ज्ञान परंपरा व इंडियन नॉलेज सिस्टम को पाठ्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में विदेशी उदाहरणों के साथ भारत में हुए सफल प्रयोगों और पारंपरिक ज्ञान को भी केस स्टडी के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। कुंभ जैसे बड़े आयोजनों से प्रबंधन, तकनीक, सामाजिक समन्वय और सेवा के उदाहरण विद्यार्थियों को दिए जा सकते हैं। उद्योगों को शिक्षा व्यवस्था का साझेदार बनाकर कौशलयुक्त एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने तथा एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने पर भी उन्होंने जोर दिया।

अति विशिष्ट अतिथि सविता सेंगर ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया है। नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा को शोध, नवाचार और कौशल विकास से जोड़ने के साथ उद्योगों को शिक्षा व्यवस्था का साझेदार बनाना होगा।

अध्यक्षता करते हुए सीसीएसयू की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि “ज्ञान सभा से जनसभा तक” केवल विषय नहीं, बल्कि व्यापक संकल्प है। ज्ञान की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका लाभ समाज और राष्ट्र के जीवन में दिखाई दे। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शोध तभी सार्थक है, जब उसके परिणाम सामाजिक समस्याओं के समाधान में उपयोगी हों। विकसित भारत के लिए महिलाओं की सक्रिय सहभागिता तथा शिक्षा के माध्यम से चरित्रवान एवं जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण जरूरी है।

न्यास के राष्ट्रीय सह-संयोजक संजय स्वामी ने कहा कि ज्ञान सभा का उद्देश्य शिक्षा को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं से जोड़ना है। आधुनिक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच प्रभावी समन्वय समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. अनिल मलिक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रो. नीलू जैन गुप्ता, प्रो. कृष्णकांत शर्मा, प्रो. शिवराज पुंडीर, प्रो. विग्नेश कुमार त्यागी, प्रो. आराधना गुप्ता, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. जितेंद्र गोयल, डॉ. भावना, डॉ. वैशाली पाटील, डॉ. विजेता गौतम, प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts