उद्योग-जगत और विश्वविद्यालय के बीच सहयोग को मिलेगा नया आयाम

सीसीएसयू में ‘इंडस्ट्री इंटरेक्शन एंड ग्लोबल आउटरीच’ कार्यक्रम, जल अपशिष्ट उपचार पर अकादमिक सहयोग के लिए हुआ एमओयू

मेरठ, 22 सितंबर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘Industry Interaction & Global Outreach’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय और उद्योग जगत के बीच संवाद, शोध, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना रहा। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की मौजूदगी में शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने उद्योग की जरूरतों और विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम में डॉ. शैलेन्द्र जायसवाल, निदेशक शोध प्रो. वीरपाल, प्रो. एमके गुप्ता, ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. आरके सोनी, डॉ. प्रियंका काकड़ और डॉ. नजीर तरन्नुम सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक मौजूद रहे। उद्योग जगत से अजय कुमार गुप्ता, अनिल गुप्ता, आदित्य जायसवाल, रविंद्र लंग, गिरीश कुमार, संदीप गोयल, अनुराग अग्रवाल, अनुज कुमार, अमित पी. शर्मा, राज कुमार बंसल, फरमान-उद-दीन, आशीष दुबे, शलभ गुप्ता, आशुतोष अग्रवाल और आनंद पांडेय सहित अन्य प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा पर जोर

बैठक में विश्वविद्यालय-उद्योग सहभागिता, विद्यार्थियों के औद्योगिक प्रशिक्षण, कौशल विकास, रोजगारोन्मुख शिक्षा, शोध एवं नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने अकादमिक विशेषज्ञता और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया।

उद्योग प्रतिनिधियों ने भी व्यावहारिक सुझाव रखे। रविंद्र लंग ने पेट्रोकेमिकल उत्पादों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के साथ काम करने में रुचि जताई। आशुतोष अग्रवाल ने ज्वेलरी उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण, जेम्स कटिंग मशीन और प्रमाणन की दिशा में विश्वविद्यालय के सहयोग का सुझाव दिया। फरमानुद्दीन ने कैंची उद्योग के विकास के लिए विश्वविद्यालय से तकनीकी सहयोग मांगा। अजय गुप्ता ने उद्योग-विश्वविद्यालय संवाद के लिए नियमित बैठकें आयोजित करने और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन व ट्रांसफर के लिए एक केंद्र बनाने का सुझाव दिया।

अनुराग अग्रवाल ने विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें उद्योग के व्यावहारिक माहौल के लिए तैयार करने पर जोर दिया। कुणाल सिंह बेरवार ने विश्वविद्यालय के पेटेंट और शोध उपलब्धियों को उद्योगों के लिए उपलब्ध कराने वाला पोर्टल विकसित करने का सुझाव दिया। आशीष दुबे ने छात्रों और शिक्षकों को अपनी कंपनी में प्रशिक्षण एवं औद्योगिक अनुभव के लिए आमंत्रित किया।

जल अपशिष्ट उपचार पर हुआ एमओयू

कार्यक्रम में सीसीएसयू और झिलमिल एंड फ्रेंड्स कॉलोनी इंडस्ट्रियल एरिया सीईटीपी सोसायटी, झिलमिल, दिल्ली के बीच अकादमिक सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत जल अपशिष्ट उपचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में संयुक्त शोध एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

एमओयू के तहत जल अपशिष्ट उपचार से जुड़े अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने, उपचार संयंत्रों की दक्षता और मानकों में सुधार तथा दोनों संस्थानों के शैक्षणिक और तकनीकी संसाधनों के साझा उपयोग पर काम किया जाएगा। साथ ही शिक्षण, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. आरके सोनी ने तैयार की। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय में हो रहे शोध कार्यों की जानकारी देते हुए उद्योगों से विश्वविद्यालय के साथ मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम को अकादमिक ज्ञान, उद्योग की जरूरतों, शोध और नवाचार के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

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