पशुपालन में स्वरोजगार की राह दिखाएगा ‘मैत्री’ प्रशिक्षण, 38 अभ्यर्थी होंगे प्रशिक्षित
कृत्रिम गर्भाधान तकनीक में दिया जाएगा 90 दिवसीय प्रशिक्षण; अलीगढ़ और पीलीभीत से पहुंचे प्रशिक्षणार्थी, कुलपति ने पशु प्रजनन की महत्ता बताई
मेरठ। भारत सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन और उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद, लखनऊ के वित्तपोषण से संचालित ‘मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया’ (मैत्री) के 90 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय सभागार में शुभारंभ हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण में अलीगढ़ और पीलीभीत जनपदों से आए 38 प्रशिक्षणार्थियों को कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को पशुपालन क्षेत्र में तकनीकी दक्षता प्रदान कर कृत्रिम गर्भाधान को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने प्रशिक्षणार्थियों को कृत्रिम गर्भाधान को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पशु उत्पादन बढ़ाने और पशु आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बेहतर पशु प्रजनन तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी तकनीकों के विस्तार से पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण की रूपरेखा बताई
कार्यक्रम की शुरुआत में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजीव सिंह ने स्वागत भाषण दिया। वहीं कोर्स डायरेक्टर डॉ. मनीष शुक्ला ने 90 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कृत्रिम गर्भाधान सहित पशुपालन से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दिए जाने की बात कही।
कार्यक्रम में ग्रामीण स्वरोजगार और स्वावलंबन में पशुपालन आधारित तकनीकों के योगदान पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक पशु प्रजनन तकनीकों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाओं से अवगत कराया गया।


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