‘सलवार उतारना और छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं’—पटना HC के फैसले पर SC सख्त
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणियों को बताया आपत्तिजनक; सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर आरोपी को नोटिस भेजने का दिया निर्देश, पक्ष सुनने के बाद होगा आगे फैसला
नई दिल्ली। पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाने के आरोपों को बलात्कार के प्रयास का अपराध नहीं माना गया था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी का पक्ष सुने बिना हाईकोर्ट के आदेश को सीधे रद्द नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है। कोर्ट ने बिहार के महाधिवक्ता एसडी संजय से कहा कि स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी को नोटिस की तामील कराई जाए, ताकि अगली सुनवाई में उसका पक्ष भी सुना जा सके।
9 जुलाई को पटना हाईकोर्ट ने आरोपी को किया था बरी
मामला वर्ष 2008 में बिहार के बांका जिले में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, युवती अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने के लिए एक स्टूडियो गई थी। आरोप था कि स्टूडियो संचालक ने उसके पिता को बाहर भेजकर दरवाजा बंद कर लिया और युवती की सलवार उतारने की कोशिश की तथा उसके सीने को दबाया।
निचली अदालत ने वर्ष 2013 में आरोपी को बलात्कार के प्रयास के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।
9 जुलाई 2026 को पटना हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बलात्कार के प्रयास की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया और आरोपी को इस आरोप से बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड पर बलात्कार के प्रयास के लिए आवश्यक स्पष्ट कृत्य और इरादा साबित नहीं हुआ। हालांकि अदालत ने माना था कि महिला को कमरे में रोकना, उसकी सलवार उतारने की कोशिश करना और उसके सीने को दबाना महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित अपराध के दायरे में आता है।
13 साल बाद आया था हाईकोर्ट का फैसला
यह मुकदमा वर्ष 2008 में दर्ज हुआ था और निचली अदालत ने 2013 में फैसला सुनाया था। इसके बाद आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील की। करीब 13 साल बाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में मामले का निपटारा करते हुए बलात्कार के प्रयास की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बलात्कार के प्रयास और महिला की गरिमा भंग करने वाले अपराध के बीच कानूनी अंतर पर भी चर्चा की थी।
आरोपी का पक्ष सुनने के बाद होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पटना हाईकोर्ट के आदेश को रद्द नहीं किया है। पीठ ने आरोपी को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। अदालत अब आरोपी का पक्ष सुनने के बाद यह तय करेगी कि हाईकोर्ट के फैसले और उसमें की गई टिप्पणियों पर आगे क्या कार्रवाई की जाए।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट पहले भी यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक भाषा और दृष्टिकोण में संवेदनशीलता पर जोर दे चुका है। पटना हाईकोर्ट के फैसले का मुद्दा इससे पहले जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य कार्यवाही के दौरान भी उठाया गया था।

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