दीयों की सौंधी खुशबू के बीच लोकसंस्कृति का संगम, माटीकला मेले में उमड़ा उत्साह
बेगमपुल मैदान में मिट्टी के उत्पादों की खरीदारी के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, कलावाटिका के कलाकारों ने बिखेरे रंग
मेरठ। दीपावली की तैयारियों के बीच बेगमपुल स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मैदान पारंपरिक कला और संस्कृति के रंगों से सराबोर है। खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से लगाए गए क्षेत्रीय माटीकला मेले में मिट्टी के दीये, आकर्षक मूर्तियां और सजावटी सामान लोगों को लुभा रहे हैं। बुधवार शाम यहां लोकनृत्यों और धार्मिक प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया।
वंदना से शुरुआत, फिर लोकनृत्यों की धूम
माटीकला महोत्सव के तहत शाम पांच बजे कलावाटिका डांस एकेडमी के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। सरस्वती-गणेश वंदना के बाद महाभारत की झांकियों और रामायण के प्रसंगों को नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया। शिव-पार्वती पर आधारित उपशास्त्रीय नृत्य के साथ गुजराती और महाराष्ट्रियन लोकनृत्यों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने कलाकारों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
कुम्हारों के हुनर को मिल रहा बाजार
मेले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से माटीकला बोर्ड की पंजीकृत इकाइयां अपने उत्पाद लेकर पहुंची हैं। दीपावली करीब आने के कारण मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियों और सजावटी सामान की मांग बढ़ रही है। मेले में खरीदारों की आवाजाही भी लगातार बढ़ रही है।
सात नवंबर तक चलेगा मेला
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने बताया कि आयोजन का मकसद स्थानीय कुम्हारों और माटीकला से जुड़े कारीगरों को सीधे बाजार उपलब्ध कराना है। इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलने के साथ मिट्टी के उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान भी बढ़ेगा। उन्होंने शहरवासियों से सात नवंबर तक चलने वाले मेले में पहुंचकर कारीगरों का उत्साह बढ़ाने की अपील की।


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