हांगकांग में गूंजा सीसीएसयू के बायो-म्यूजिकोलॉजी शोध का स्वर
प्रो. डॉ. दिनेश शर्मा के ‘वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा’ प्रारूप ने खींचा वैश्विक विशेषज्ञों का ध्यान, अमेरिकी संस्था से शोध सहयोग की पहल
मेरठ, 7 अक्टूबर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) दिनेश सी. शर्मा ने हांगकांग में आयोजित 2026 एशिया-प्रशांत स्वस्थ दीर्घायु अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में विश्वविद्यालय के शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। एक से चार अक्टूबर तक आयोजित सम्मेलन में उन्हें विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बायो-म्यूजिकोलॉजी और संगीत चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे शोध के साथ ध्वनि-कंपन आधारित तकनीक की संभावनाओं पर विशेषज्ञों के सामने विचार रखे।
सम्मेलन में विभिन्न देशों के 2,000 से अधिक शोधकर्ता, वैज्ञानिक, चिकित्सक, उद्योग प्रतिनिधि, नवप्रवर्तक, निवेशक और स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल हुए। स्वस्थ दीर्घायु, वृद्धावस्था विज्ञान, डिजिटल हेल्थ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य नवाचार और नई चिकित्सा तकनीकों पर मंथन हुआ।
ध्वनि, मस्तिष्क और दीर्घायु पर व्याख्यान
प्रो. शर्मा ने ‘ध्वनि, मस्तिष्क एवं दीर्घायु : संगीत चिकित्सा और जैव-संगीत विज्ञान को स्वस्थ वृद्धावस्था के उपायों में रूपांतरित करना’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि, संगीत और लय के मस्तिष्क, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव तथा स्वस्थ वृद्धावस्था पर संभावित प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने जैव-संगीत विज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वस्थ दीर्घायु संबंधी उपायों से जोड़ने की संभावनाएं भी सामने रखीं।
‘वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा’ बनी आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन में प्रो. शर्मा द्वारा स्तन कैंसर संबंधी अनुसंधान के लिए विकसित किए जा रहे ‘वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा’ के प्रारूप ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों का ध्यान खींचा। यह नियंत्रित ध्वनि और कंपन आधारित तकनीक को स्तन स्वास्थ्य एवं कैंसर संबंधी अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में विकसित किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके प्रदर्शन से सीसीएसयू में हो रहे जैव-संगीत विज्ञान संबंधी शोध को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
अमेरिकी संस्था से शोध सहयोग की पहल
सम्मेलन के दौरान अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित लेवल 42 एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शाशा जुम्बे के साथ संभावित शोध सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। प्रो. शर्मा के अनुसार, एमओयू होने के बाद संयुक्त अनुसंधान के लिए करीब 20 हजार अमेरिकी डॉलर मूल्य के ‘वाइब्रोम पल्स यूएनए’ और लेनोवो के-11 टैबलेट आधारित उपकरण निशुल्क उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है।
प्रस्तावित सहयोग से जैव-संगीत विज्ञान, ध्वनि-कंपन आधारित हस्तक्षेप और स्वास्थ्य से जुड़े शारीरिक परिवर्तनों की निगरानी को डिजिटल तकनीक एवं डेटा विश्लेषण से जोड़ने में मदद मिलने की संभावना है।
कैंसर परिचर्चा में ज्योति शर्मा ने रखे विचार
सम्मेलन में ज्योति शर्मा ने कैंसर विषयक परिचर्चा में भाग लेते हुए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बाद रोगियों में वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा की संभावित भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने इस दिशा में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश की संभावनाएं
प्रो. शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में विश्वविद्यालय की भागीदारी का उद्देश्य शोध को प्रस्तुत करने के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ सहयोग के अवसर तलाशना भी था। शोध अनुदान और निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। एशिया-प्रशांत दीर्घायु चिकित्सा सोसायटी की ओर से सीसीएसयू के जंतु विज्ञान विभाग के साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने में रुचि जताई गई।
प्रो. शर्मा ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचाने के साथ अत्याधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध वित्तपोषण के नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। उनका प्रयास जैव-संगीत विज्ञान और ध्वनि-कंपन तकनीक को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर स्वास्थ्य एवं स्वस्थ वृद्धावस्था के क्षेत्र में उपयोगी बनाना है।


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