सुदर्शन क्रिया से मिली नई सुबह, सात साल से नशामुक्त हैं मनोज

शराब की गहरी लत, टूटते रिश्तों और निराशा से निकले; साधना और सेवा को बनाया जीवन का आधार

मेरठ। कभी शराब के बिना दिन गुजारना मुश्किल था। सुबह शुरू होने के साथ शराब की तलाश, फिर धीरे-धीरे परिवार से दूरी, रिश्तों में तनाव, नींद की परेशानी और मानसिक बेचैनी... मेरठ के मनोज चौहान की जिंदगी एक ऐसे दौर से गुजर रही थी, जहां उन्हें भविष्य भी अंधकारमय नजर आने लगा था। कई बार शराब छोड़ने का संकल्प लिया, लेकिन हर बार पुरानी आदत वापस लौट आती।

इसी संघर्ष के बीच आर्ट ऑफ लिविंग और सुदर्शन क्रिया उनके जीवन में आए। शुरुआत में बदलाव आसान नहीं था, लेकिन नियमित साधना के साथ धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या और सोच बदलने लगी। आज 29 सितंबर 2026 को शराब छोड़े उन्हें सात वर्ष पूरे हो चुके हैं। अब साधना के साथ सेवा उनके जीवन का हिस्सा बन गई है।

पहली सुदर्शन क्रिया के बाद महसूस हुई राहत

मनोज बताते हैं कि वर्ष 2009 में एक अखबार में आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम का विज्ञापन देखा। उस समय शराब पर निर्भरता के साथ नींद की समस्या भी परेशान कर रही थी। उन्होंने मेरठ में सुदर्शन क्रिया का कोर्स किया।

उनके अनुसार, पहली बार क्रिया करने के बाद लंबे समय बाद उन्हें गहरी और सुकून भरी नींद आई। कुछ दिनों तक नियमित अभ्यास किया तो भीतर सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगा। हालांकि कुछ समय बाद नियमितता टूट गई और शराब की आदत फिर लौट आई।



गुरुदेव से मुलाकात ने जगाई उम्मीद

वर्ष 2018 में पत्नी के साथ दोबारा आर्ट ऑफ लिविंग का कोर्स करने के बाद मनोज ऋषिकेश आश्रम पहुंचे। वहां उन्हें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। इस अनुभव ने उन्हें नई उम्मीद दी।

उन्होंने एक महीने तक शराब को हाथ नहीं लगाया, लेकिन कुछ समय बाद पुरानी आदत फिर लौट आई। इस बार स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो गई। इसके बावजूद उन्होंने बदलाव की कोशिश नहीं छोड़ी।

लॉकडाउन में साधना बनी जीवन का हिस्सा

मनोज के जीवन में निर्णायक मोड़ कोविड काल के दौरान आया। लॉकडाउन में जब ऑनलाइन ध्यान और ‘ॐ नमः शिवाय’ के सत्र शुरू हुए तो वह नियमित रूप से उनसे जुड़ने लगे। ध्यान, सुदर्शन क्रिया और साधना धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गई।

नियमित अभ्यास के साथ उन्होंने महसूस किया कि शराब पीने की इच्छा धीरे-धीरे कम हो रही है। मनोज कहते हैं कि इस बार उन्होंने शराब छोड़ने के लिए खुद पर दबाव नहीं डाला। साधना के साथ उनका मन ही धीरे-धीरे उस आदत से दूर होता चला गया।

नशे से बाहर आए तो सेवा को बनाया उद्देश्य

शराब से बाहर निकलने के बाद मनोज ने अपने अनुभव को केवल खुद तक सीमित नहीं रखा। आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़कर उन्होंने सेवा कार्य शुरू किए और गांव तथा अपनी कॉलोनी के लोगों के साथ कोर्स एवं साधना का अनुभव साझा करने लगे।

आज वह नियमित रूप से साधना और सेवा से जुड़े हुए हैं। सात वर्ष से नशामुक्त जीवन जी रहे मनोज उन लोगों के साथ खड़े होने की कोशिश करते हैं, जो किसी न किसी तरह के नशे या मानसिक संघर्ष से जूझ रहे हैं।

वह कहते हैं, “जो मेरे साथ हुआ, वह किसी के साथ भी संभव है। अगर कोई संघर्ष कर रहा है तो मैं उसके साथ खड़ा हूं।”

संघर्ष से निकली सेवा की राह

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मनोज की कहानी मानसिक और भावनात्मक संघर्ष से जूझ रहे लोगों के लिए उम्मीद का संदेश देती है। उनकी यात्रा यह दिखाती है कि जीवन में बदलाव की शुरुआत कभी-कभी एक छोटे से प्रयास से होती है। मनोज के लिए सुदर्शन क्रिया अब केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि उनके अनुसार नशे से बाहर निकलकर साधना और सेवा की ओर बढ़ने वाले नए जीवन की शुरुआत बन चुकी है।

हालांकि नशे की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में पेशेवर चिकित्सकीय सहायता भी महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति को ऐसे संघर्ष से गुजरते समय योग्य चिकित्सक या नशामुक्ति विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

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