गन्ने की फसल से लेकर प्लेसमेंट तक, छात्रों को दी तकनीकी और व्यक्तित्व विकास की ट्रेनिंग

एसवीपीयूएटी में एकदिवसीय कार्यशाला, 9 अक्टूबर को बलरामपुर शुगर मिल के प्लेसमेंट ड्राइव की तैयारी पर भी जोर

मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के दिशा-निर्देशन में कॉलेज ऑफ शुगरकेन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें छात्रों को गन्ने की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, कीटों से होने वाले नुकसान और विभिन्न रोगों के फसल पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ उनके प्रभावी प्रबंधन की जानकारी दी गई।

प्लेसमेंट ड्राइव से पहले तकनीकी प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट डॉ. आरएसएस ने बताया कि विश्वविद्यालय में 9 अक्टूबर को बलरामपुर शुगर मिल की ओर से स्पेशल प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित किया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग से जुड़ी तकनीकी जानकारी देने के साथ रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की तकनीकी जानकारी के साथ उद्योग की जरूरतों को समझना भी जरूरी है। इससे वे प्लेसमेंट प्रक्रिया में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

टीम भावना और लक्ष्य निर्धारण पर विशेष सत्र

कार्यशाला में विद्यार्थियों के लिए टीम भावना, लक्ष्य निर्धारण और बड़े सपने देखने को लेकर विशेष सत्र आयोजित किया गया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को टीम में प्रभावी सहयोग, रचनात्मक सोच और बेहतर समन्वय के बारे में जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि सफल करियर के लिए केवल व्यक्तिगत प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है। टीमवर्क, सकारात्मक दृष्टिकोण, लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया गया।

संचार कौशल विकसित करने पर जोर

डॉ. सेंगर ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान के साथ संचार कौशल, टीम भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन क्षमताओं के विकास से विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकेंगे और उद्योग जगत में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

कार्यशाला में प्रो. गजे सिंह, डॉ. रविशंकर, प्रो. पंकज कुमार, प्रो. मनोज यादव, डॉ. संजीव कुमार गुप्ता, डॉ. निमिषा टेहरी सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के साथ उन्हें रोजगार के लिए भी तैयार करना है।

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