इजराइल में सरकार बनाने की कवायद तेज, गादी आइजनकोट ने तीन विपक्षी नेताओं से की मुलाकात
नेतन्याहू खेमे को बहुमत नहीं मिलने का दावा, आइजनकोट गठबंधन को 48 और लिकुड खेमे को 53 सीटें; सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी
तेल अवीव। इजराइल में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाने में लगे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलान, बियाचाद के प्रमुख नफ्ताली बेनेट और विपक्षी नेता यायर लैपिड से मुलाकात की। आइजनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी पर चुनाव परिणामों को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बहुमत नहीं मिलने के कारण नेतन्याहू खेमे की ओर से नतीजों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
किसी भी गठबंधन के पास नहीं है बहुमत
चुनाव के उपलब्ध नतीजों के मुताबिक, आइजनकोट के गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं, जबकि नेतन्याहू के नेतृत्व वाले खेमे को 53 सीटें हासिल हुई हैं। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में दोनों प्रमुख खेमों के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। उन्हें सरकार गठन के लिए अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करना होगा।
अरब पार्टियों की भूमिका भी अहम
चुनाव में अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें जॉइंट लिस्ट गठबंधन को 11 सीटें मिली हैं। यह गठबंधन इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों और अरब-यहूदी नागरिकों की समानता की पैरवी करता है। इसमें हदाश, ताल और बलद तीन पार्टियां शामिल हैं।
2015 में पहली बार बना था जॉइंट लिस्ट गठबंधन
जॉइंट लिस्ट गठबंधन पहली बार 2015 के चुनाव से पहले अस्तित्व में आया था। उस समय अरब समुदाय की चार प्रमुख पार्टियों ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया था। गठबंधन को 13 सीटें मिली थीं। 2019 में भी इसने 13 सीटें हासिल कीं, जबकि 2020 में प्रदर्शन बेहतर रहा और 15 सीटें मिलीं।
2021 में आपसी मतभेदों के कारण राअम गठबंधन से अलग हो गई। 2022 में हदाश और ताल ने साथ चुनाव लड़ा, जबकि बलद अलग हो गई थी और जरूरी 3.25 प्रतिशत वोट हासिल नहीं कर पाई थी। 2026 के चुनाव में हदाश, ताल और बलद फिर एक साथ मैदान में उतरीं, जबकि राअम ने अलग चुनाव लड़ा।
सरकार गठन के लिए समर्थन जुटाने की चुनौती
इजराइल में त्रिशंकु संसद जैसी स्थिति बनने के बाद सरकार गठन का रास्ता गठबंधन की बातचीत पर निर्भर करेगा। आइजनकोट विपक्षी दलों को एकजुट कर बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, नेतन्याहू का खेमा भी जरूरी समर्थन हासिल करने की चुनौती से जूझ रहा है। आने वाले दिनों में छोटे दलों और अरब गठबंधन का रुख सरकार गठन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।


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