एमडीआर टीबी मरीजों को बड़ी राहत, अब 18 नहीं सिर्फ 6 महीने चलेगा इलाज

रोजाना चार गोलियों से होगा इलाज

मेरठ । मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें वर्षों तक दवाओं का सेवन नहीं करना पड़ेगा। आधुनिक बीपाल-एम (BPaL-M) रेजिमेन के जरिए पात्र मरीजों का उपचार महज छह महीने में पूरा किया जा सकेगा। पहले इस बीमारी के इलाज में करीब 18 महीने तक दवाएं खानी पड़ती थीं। 

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विपुल कुमार ने बताया बीपाल-एम रेजिमेन पद्धति से किया जा रहा है।बीपाल-एम रेजिमेन में बेडाक्विलीन, प्रीटोमैनिड, लाइनजोलिड और मोक्सीफ्लॉक्सासिन चार दवाओं का संयोजन शामिल है। इस पद्धति में मरीज को छह महीने तक रोजाना चार गोलियां खानी होती हैं। पूरा उपचार ओरल है, इसलिए इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे मरीजों को इलाज के दौरान काफी सहूलियत मिलती है।

क्या है एमडीआर टीबी

मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी में टीबी के बैक्टीरिया पर कम से कम दो प्रमुख दवाओं आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन का असर नहीं होता। दवाओं का अनियमित सेवन या इलाज बीच में छोड़ने से इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बलगम या खून आना, बुखार, रात में पसीना, वजन घटना, भूख न लगना और कमजोरी शामिल हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रसाद  ने बताया कि बीपाल-एम रेजिमेन टीबी मुक्त भारत अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, यह उपचार केवल निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र मरीजों को ही दिया जाता है। उपचार के दौरान नियमित चिकित्सकीय निगरानी भी जरूरी है।

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