हार्ट की सेहत के लिए सिर्फ सामान्य जांच काफी नहीं

2.4 लाख लोगों के आंकड़ों में करीब आधे में हृदय स्वास्थ्य से जुड़े संकेतक असामान्य; विशेषज्ञों ने जोखिम के अनुसार जांच पर दिया जोर

नई दिल्ली। भारत में बीमारी के लक्षण सामने आने से पहले स्वास्थ्य जांच कराने का चलन बढ़ रहा है। रेडक्लिफ लैब्स के अनुसार, उसकी करीब दो-तिहाई जांचें प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप के उद्देश्य से कराई जाती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दिल की सेहत का आकलन केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच से हमेशा पूरा नहीं हो सकता।

रेडक्लिफ लैब्स के राष्ट्रीय आंकड़ों में सबसे अधिक कराई जाने वाली जांचों में सीबीसी, लिपिड प्रोफाइल, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट और एचबीए1सी शामिल हैं। वहीं, कंपनी द्वारा छह महीने में 2.4 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों के विश्लेषण में करीब आधे लोगों में कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल, एचडीएल, ट्राइग्लिसराइड्स, एचएस-सीआरपी, एलपी(ए), एनटी-प्रोबीएनपी और एचएस-ट्रोपोनिन आई जैसे हृदय स्वास्थ्य से जुड़े संकेतकों में असामान्य परिणाम मिले। 26 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में यह अनुपात 48 प्रतिशत और 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में करीब 52 प्रतिशत रहा।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि असामान्य जांच परिणाम अपने आप में हृदय रोग की पुष्टि नहीं करते। रक्तचाप, रक्त शर्करा, रक्त में वसा, अधिक वजन, धूम्रपान, खान-पान और शारीरिक गतिविधि जैसे कारक भी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

रेडक्लिफ लैब्स की डायरेक्टर-लैब ऑपरेशंस डॉ. सोनल सक्सेना ने कहा कि सामान्य लिपिड प्रोफाइल आने का अर्थ यह नहीं है कि हृदय से जुड़े सभी जोखिम समाप्त हो गए हैं। जोखिम वाले लोगों में चिकित्सकीय सलाह के आधार पर एलपी(ए), एपीओबी और एचएस-सीआरपी जैसे अतिरिक्त संकेतकों से अधिक जानकारी मिल सकती है। उन्होंने जोर दिया कि लक्ष्य अधिक से अधिक जांच कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति के जोखिम के अनुसार उपयुक्त जांच का चयन करना होना चाहिए।

एलपी(ए) पर भी बढ़ा जोर

एलपी(ए) पर आनुवंशिक प्रभाव अधिक होता है और इसका बढ़ा स्तर एथेरोस्क्लेरोटिक हृदय रोग के जोखिम से जुड़ा है। वहीं एपीओबी धमनियों में वसा जमा होने से जुड़े कणों की जानकारी देता है। एचएस-सीआरपी सूजन से संबंधित अतिरिक्त जानकारी दे सकता है, जबकि एचएस-ट्रोपोनिन आई और एनटी-प्रोबीएनपी का उपयोग विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में हृदय की क्षति या उस पर पड़ने वाले दबाव के आकलन में किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों को ध्यान में रखकर चिकित्सकीय सलाह लेना हृदय स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी में मदद कर सकता है।

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