नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जेल भेजे गए
मिलन प्रधान को 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत, 2007 के पुराने मामलों में हुई गिरफ्तारी
कोलकाता। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने शनिवार को प्रधान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने उन्हें 2007 के पुराने मामलों में हत्या और हत्या के प्रयास समेत चार मामलों में लंबित वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया था। अब वह तीन अक्टूबर तक जेल में रहेंगे।
ममता के समर्थन के बाद गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी शुक्रवार को उस समय हुई, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने की घोषणा की थी। कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया। प्रधान ने अदालत ले जाते समय दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस उनसे डर रही है। गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हल्दिया कोर्ट परिसर में प्रदर्शन भी किया।
पुलिस बोली- पुराने वारंट के आधार पर हुई कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि प्रधान के खिलाफ 2007 से संबंधित पुराने मामलों में गिरफ्तारी वारंट लंबित थे और वह लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे। पुलिस के अनुसार चार्जशीट में भी उन्हें फरार बताया गया है। पुलिस ने गिरफ्तारी को चुनावी राजनीति से जोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उपचुनाव से पहले लंबित मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की गई।
चुनाव लड़ने पर तत्काल रोक नहीं
प्रधान को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बावजूद उनकी उम्मीदवारी पर तत्काल कोई रोक नहीं लगती। हालांकि, जेल में रहने की स्थिति में उनके व्यक्तिगत रूप से चुनाव प्रचार करने पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि गिरफ्तारी के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे और पार्टी कार्यकर्ता उनके पक्ष में प्रचार जारी रखेंगे।
15 अक्टूबर नहीं, तीन अक्टूबर तक हिरासत
अदालत ने संबंधित मामलों में जवाब और दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए आगे की सुनवाई तय की है। प्रधान की न्यायिक हिरासत 3 अक्टूबर तक रहेगी। इसके बाद उनकी जमानत और अन्य कानूनी कार्रवाई पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। नंदीग्राम उपचुनाव में इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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