राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने मुख्य सचिव को भेजा अभ्यावेदन, खरीदारों के राहत-पुनर्वास की मांग

मेरठ। बिना स्वीकृति विकसित बस्तियों और अनधिकृत निर्माण के मामले में आम खरीदारों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर आजाद अधिकार सेना ने शासन को अभ्यावेदन भेजा है। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन से कहा है कि उनके पास उपलब्ध साक्ष्य सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चल रहे प्रकरण और गठित न्यायिक आयोग की जांच में प्रस्तुत किए जाएं।

राणा के अनुसार, मेरठ में बड़ी संख्या में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों ने बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के आश्वासन पर प्लॉट, मकान और दुकानें खरीदीं। उनका कहना है कि यदि खरीदारों ने सद्भावना से संपत्ति खरीदी है तो उन्हें कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य बनाने के बजाय वास्तविक रूप से जिम्मेदार कॉलोनाइजरों और संबंधित लोकसेवकों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

अभ्यावेदन में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि मेरठ के एक जोन में 16,726 अनधिकृत ढांचे चिन्हित किए गए हैं। इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय-सह-व्यावसायिक और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण बताए गए हैं। इसके अलावा 44 संपत्तियां, सेटबैक क्षेत्र से जुड़ी 201 संपत्तियां तथा आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग से जुड़ी 486 संपत्तियां भी चिन्हित होने की बात कही गई है।

देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि उनके पास कॉलोनाइजरों की भूमिका, भूमि लेन-देन तथा प्रशासनिक स्तर पर कथित निष्क्रियता से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं। संगठन ने इन्हें न्यायिक आयोग और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के समक्ष रखने का अवसर मांगा है।

अभ्यावेदन में दोषी कॉलोनाइजरों व जिम्मेदार लोकसेवकों पर नियमानुसार कार्रवाई, प्रभावित वास्तविक खरीदारों के लिए राहत, मुआवजा अथवा पुनर्वास की व्यवस्था तथा अभ्यावेदनकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संगठन ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में बाधा का पक्षधर नहीं है, बल्कि वास्तविक जिम्मेदारी तय करने और निर्दोष खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए साक्ष्य उपलब्ध कराना चाहता है।

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