स्तनपान के मिथकों को दूर करने पर चिकित्सकों ने किया मंथन
ISOPARB मेरठ चैप्टर की शैक्षणिक बैठक में माताओं को सही जानकारी देने पर जोर
मेरठ। ISOPARB मेरठ चैप्टर की ओर से होटल हार्मनी में ‘Breastfeeding: Myths, Misconceptions & Real-Life Challenges’ विषय पर शैक्षणिक बैठक आयोजित की गई। इसमें स्तनपान से जुड़े मिथकों, भ्रांतियों और माताओं के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चिकित्सकों ने चर्चा की।
बैठक में सामान्य प्रसव या सीजेरियन, दोनों ही स्थितियों में जन्म के पहले घंटे में शिशु को मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाने के महत्व पर जोर दिया गया। चिकित्सकों ने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत होने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक है। माताओं के प्रसवोत्तर स्वास्थ्य और मां-शिशु के भावनात्मक जुड़ाव के लिए भी स्तनपान को महत्वपूर्ण बताया गया।
माताओं को शिशु की मांग के अनुसार बार-बार स्तनपान कराने, रात में भी स्तनपान जारी रखने और बिना चिकित्सकीय सलाह के टॉप फीड शुरू नहीं करने के प्रति जागरूक करने पर चर्चा हुई। सही लैच, उचित स्थिति और सीजेरियन प्रसव के बाद आरामदायक तरीके से स्तनपान कराने की जानकारी भी साझा की गई। दूध भरने, दर्द, लालिमा, गर्माहट और बुखार जैसे संभावित मास्टाइटिस लक्षणों की पहचान पर भी जानकारी दी गई। कम दूध बनने की स्थिति में सही लैच, बार-बार स्तनपान, पर्याप्त आराम और संतुलित आहार के महत्व को बताया गया।
कार्यक्रम में अस्पतालों और क्लीनिकों में स्तनपान जागरूकता गतिविधियां संचालित करने वाले सदस्यों को संरक्षक डॉ. उषा शर्मा ने सम्मानित किया। अध्यक्ष डॉ. भारती माहेश्वरी, उपाध्यक्ष डॉ. प्रियंका व डॉ. राजीव प्रकाश, सचिव डॉ. अर्चना गोयल, संयुक्त सचिव डॉ. मधुलिका सहित डॉ. अजय जैन, डॉ. नवरत्न गुप्ता, डॉ. विजय जायसवाल, डॉ. मंजुला लखनपाल, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. तरुण गोयल और डॉ. अंजू रस्तोगी मौजूद रहे।

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