अफ्रीकी श्रम चुनौतियों के समाधान में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता
सीसीएसयू के डॉ. विवेक त्यागी ने अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान में सतत मानव संसाधन प्रबंधन पर रखे विचार
मेरठ। अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप विश्वविद्यालय के अफ्रीका चैप्टर की ओर से आयोजित विशेष अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान में “सतत मानव संसाधन प्रबंधन : वैश्विक विधि एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन विभाग के अध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने अफ्रीकी देशों की श्रम एवं मानव संसाधन संबंधी चुनौतियों तथा उनके समाधान में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
डॉ. त्यागी ने कहा कि अनेक अफ्रीकी देशों में अनौपचारिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिकों की मौजूदगी, युवाओं में बेरोजगारी, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, सीमित कौशल विकास और प्रतिभा-पलायन जैसी चुनौतियां सतत एवं मानवीय मानव संसाधन प्रबंधन के लिए बड़ी बाधा हैं। सतत विकास लक्ष्य और शालीन कार्य एवं आर्थिक संवृद्धि के लक्ष्य हासिल करने के लिए मानव संसाधन नीतियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है।
वैश्विक कानून और भारतीय ज्ञान का समन्वय
व्याख्यान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मूल अभिसमयों, संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय एवं मानवाधिकार संबंधी निर्देशक सिद्धांत, यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट, सतत विकास लक्ष्यों और यूरोपीय संघ के कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग निर्देश जैसे वैश्विक ढांचों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये संगठनों के लिए न्यूनतम अनुपालन मानक तय करते हैं।
इसके साथ ही कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित श्रमिक कल्याण, महात्मा गांधी के न्यासिता सिद्धांत, “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना और धर्म आधारित कर्तव्य-नीति संगठनात्मक व्यवस्था को नैतिक एवं मानवीय दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक कानून न्यूनतम मानक देता है, जबकि भारतीय ज्ञान परंपरा कर्मचारी को केवल संसाधन न मानकर उसके कल्याण को नियोक्ता के दायित्व से जोड़ती है।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चार्ल्स यूसियूलो इबोरियन ने डॉ. त्यागी का स्वागत करते हुए उनके शोध एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक योगदान की सराहना की। कार्यक्रम में अफ्रीका सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षाविद और मानव संसाधन क्षेत्र के पेशेवर शामिल हुए। वक्ताओं ने ऐसे आयोजनों को वैश्विक शैक्षणिक संवाद और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने वाला माध्यम बताया।

No comments:
Post a Comment