मेरठ की बेटी पारुल ने फिर लहराया परचम, 5000 मीटर में कांस्य

दो एशियाई खेलों में दो-दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनने का गौरव, स्टीपलचेज के बाद 5000 मीटर में भी पोडियम पर

मेरठ। मेरठ की बेटी और ओलिंपियन धाविका पारुल चौधरी ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। सोमवार को महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ के फाइनल में पारुल ने 15:14.61 मिनट का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। पूरी रेस में पदक की होड़ में बनी रहीं पारुल ने शानदार फिनिश के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 15:10.18 मिनट के साथ स्वर्ण और जापान की नोजोमी तनाका ने 15:11.65 मिनट में रजत पदक जीता। पारुल का यह एशियाई खेलों में लगातार दूसरा 5000 मीटर पदक है। 2023 हांगझोऊ एशियाई खेलों में उन्होंने इसी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।



एक ही एशियाड में दो पदक

पारुल इससे पहले 3000 मीटर स्टीपलचेज में भी कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इस स्पर्धा में उन्होंने 9:08.67 मिनट का समय निकालकर अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया था। हांगझोऊ एशियाई खेलों में उन्होंने स्टीपलचेज में रजत और 5000 मीटर में स्वर्ण जीता था। इस तरह लगातार दो एशियाई खेलों में दोनों स्पर्धाओं में पदक जीतकर उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स में खास रिकॉर्ड बनाया है।

नंगे पैर दौड़ने से ओलिंपिक तक का सफर

इकलाुता गांव के किसान परिवार में जन्मीं पारुल ने बेहद सामान्य परिस्थितियों से अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स तक का सफर तय किया। स्कूल के दिनों में उन्होंने नंगे पैर दौड़कर शुरुआत की। बाद में 800 मीटर से आगे बढ़ते हुए 1500, 3000, 5000 मीटर और स्टीपलचेज को अपनी प्रमुख स्पर्धाएं बनाया।

2015 में पश्चिम रेलवे में नौकरी मिलने के बाद उन्होंने पेशेवर स्तर पर एथलेटिक्स जारी रखा। 2023 में एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्टीपलचेज का स्वर्ण जीतने के साथ उनका अंतरराष्ट्रीय करियर नई ऊंचाई पर पहुंचा। इसके बाद विश्व चैंपियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड और पेरिस ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने तक उन्होंने लगातार उपलब्धियां हासिल कीं।

2024 में बनीं यूपी पुलिस में डीएसपी

पारुल ने 2024 पेरिस ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसी वर्ष उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) नियुक्त किया गया। 2025 में उन्होंने स्टीपलचेज का राष्ट्रीय रिकॉर्ड दो बार बेहतर किया। 2026 में 5000 मीटर में भी उन्होंने 15:04.26 मिनट का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।

आइची-नागोया में स्टीपलचेज और 5000 मीटर दोनों में कांस्य जीतकर पारुल ने एक बार फिर साबित किया कि मेरठ की मिट्टी से निकली यह धाविका अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर लगातार भारत का नाम रोशन कर रही है।

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