श्रेष्ठ सौ रचनाकारों में शामिल हुए डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'

नई दिल्ली।हिंदी साहित्य की संवर्धन यात्रा में एक सदी से अधिक का गौरवशाली इतिहास समेटे प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'सारस्वत फाउंडेशन, नई दिल्ली' ने हिंदी माह के पावन अवसर पर वर्ष 2025-26 के लिए देश-विदेश के श्रेष्ठ सौ प्रमुख रचनाकारों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। भारतेंदु युग के प्रख्यात साहित्यकार राधाचरण गोस्वामी द्वारा 1915 में स्थापित इस ऐतिहासिक संस्था की यह सूची किसी पारंपरिक मूल्यांकन पर नहीं, बल्कि भारत और विदेशों के विश्वविद्यालयों के पाँच हज़ार से अधिक युवा विद्यार्थियों व शोधार्थियों के बीच कराए गए व्यापक एवं वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर आधारित है। वर्तमान पीढ़ी की साहित्यिक रुचि और वैचारिक रुझान को रेखांकित करने वाली इस प्रतिष्ठित सूची में देश के जाने-माने व्यंग्यकार व लेखक डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' को 38वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।
फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. प्रणव कुमार ने परिणामों की घोषणा करते हुए कहा कि यह चयन समकालीन साहित्य की दिशा और युवा वर्ग के साथ रचनाकारों के प्रगाढ़ संबंध का जीवंत प्रमाण है।
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' को यह विशिष्ट स्थान मुख्य रूप से उनके बहुचर्चित व्यंग्य उपन्यास 'यादों में गौरैया' की अभूतपूर्व लोकप्रियता और साहित्यिक स्वीकार्यता के चलते मिला है।
उनकी इस उपलब्धि पर देशभर के वरिष्ठ साहित्यकारों, शिक्षकों, शोधार्थियों और पाठकों ने उन्हें हार्दिक बधाइयाँ प्रेषित की हैं।
 साहित्यिक हलकों का मानना है कि 'यादों में गौरैया' जैसी सशक्त कृतियों के माध्यम से व्यंग्य साहित्य को जो नई रचनात्मक ऊर्जा और ताजगी मिली है, यह सम्मान उसी निष्ठा और लेखन-प्रतिबद्धता का उचित समादर है।

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