477 अवैध कॉलोनियों ने खोली मेडा की पोल, अब न्यायिक आयोग करेगा जांच
मेरठ। उल्देपुर क्षेत्र में तेजी से विकसित हुई अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक आयोग के गठन से मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आयोग उल्देपुर में पिछले पांच वर्षों के दौरान विकसित हुई अवैध आवासीय कॉलोनियों की जांच करेगा। इस दौरान मेडा में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया को आयोग का अध्यक्ष और प्रमुख सचिव आवास पी. गुरुप्रसाद को नोडल अधिकारी बनाया है। आयोग पांच प्रमुख बिंदुओं पर जांच करेगा। इनमें कॉलोनियों के लिए इस्तेमाल की गई जमीन का स्वामित्व, भूमि मालिकों और खरीदारों के बीच हुए लेन-देन तथा अवैध कॉलोनियों के विकास में संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे बिंदु शामिल हैं।
पांच साल तक क्यों नहीं रोकी गईं कॉलोनियां
आयोग यह भी जांच करेगा कि यदि जमीन निजी व्यक्तियों की थी तो बड़े भूखंडों पर भूमि स्वामियों और खरीदारों के बीच लेन-देन किस प्रकार हुआ। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मेडा पांच वर्ष से अधिक समय तक इन क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों के विकास को रोकने में प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर सका। यदि जांच में अधिकारियों की मिलीभगत या सांठगांठ सामने आती है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान भी की जाएगी।
दो प्रवर्तन दल, फिर भी बढ़ती गईं कॉलोनियां
मेडा ने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के लिए दो प्रवर्तन दल गठित कर रखे हैं। शहर को चार जोन-ए, बी, सी और डी में बांटकर प्रवर्तन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इन दलों का दायित्व अवैध निर्माण और कॉलोनियों को विकसित होने से रोकना है। इसके बावजूद अवैध कॉलोनियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई।
तीन साल पहले मेडा की अधिकृत वेबसाइट पर 366 अवैध कॉलोनियों की सूची जारी की गई थी। वहीं पिछले वर्ष कराए गए सर्वे में इनकी संख्या बढ़कर 477 सामने आई। यानी 111 अवैध कॉलोनियां और बढ़ गईं। हालांकि मेडा की वेबसाइट पर अभी भी 366 अवैध कॉलोनियों की सूची ही प्रदर्शित हो रही है।
पूर्व वीसी और सचिव भी जांच के दायरे में
न्यायिक आयोग उल्देपुर में पिछले पांच वर्षों के दौरान विकसित हुई अवैध कॉलोनियों की जांच के साथ उस अवधि में मेडा में तैनात रहे वीसी, सचिव और प्रवर्तन अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करेगा। आयोग की जांच में यह स्पष्ट करने का प्रयास होगा कि अवैध कॉलोनियों के लगातार विस्तार को रोकने में जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और उनकी भूमिका क्या रही।

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