डीएचएल एक्सप्रेस की सेवाएं 2027 में होंगी महंगी, भारत में 8.9% बढ़ेगी कीमत
1 जनवरी से लागू होंगे नए रेट; महंगाई, ऊर्जा लागत और बदलते रेगुलेटरी खर्च को बताया प्रमुख वजह
गाजियाबाद, 26 सितंबर। अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सर्विस प्रोवाइडर डीएचएल एक्सप्रेस ने भारत में वर्ष 2027 के लिए सालाना प्राइस एडजस्टमेंट की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक 1 जनवरी 2027 से भारत में कीमतों में 8.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू होगी।
डीएचएल एक्सप्रेस साउथ एशिया के एसवीपी आरएस सुब्रमण्यम ने कहा कि बदलते वैश्विक कारोबारी माहौल में ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंपनी अपने ग्लोबल नेटवर्क, डिजिटल क्षमताओं, सुरक्षा ढांचे और सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स समाधानों में लगातार निवेश कर रही है। उनके अनुसार सालाना प्राइस एडजस्टमेंट से सेवा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।
कंपनी ने बताया कि वह हर साल कीमतों में बदलाव करते समय महंगाई, मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और इंडस्ट्री से जुड़े लागत बदलावों को ध्यान में रखती है। ऊर्जा लागत, कस्टम और रेगुलेटरी नियमों में बदलाव, सुरक्षा उपायों से जुड़े प्रशासनिक खर्च तथा कई देशों में श्रम लागत का दबाव भी परिचालन खर्च को प्रभावित कर रहा है।
फ्लीट और डिजिटल नेटवर्क पर निवेश
डीएचएल एक्सप्रेस ने अपने ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लीट आधुनिकीकरण, डिजिटल क्षमताओं और ऑपरेशनल रेजिलिएंस में निवेश जारी रखने की बात कही है। कंपनी के अनुसार उसके 28 बोइंग 777 फ्रेटर वाले फ्लीट की डिलीवरी पूरी हो चुकी है और ज्यादा ईंधन-कुशल विमानों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जा रहा है।
कंपनी ने 2026 में दुनिया भर में 500 से अधिक TAPA-सर्टिफाइड सुविधाओं का आंकड़ा पार करने की भी जानकारी दी। इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी, सिस्टम रेजिलिएंस, शिपमेंट विजिबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है।
एआई और सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स पर जोर
डीएचएल एक्सप्रेस डिजिटल कस्टमर सॉल्यूशंस में एआई-आधारित क्षमताओं और MyDHL+ प्लेटफॉर्म के विस्तार पर भी काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक इनसे ग्राहकों के लिए क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
सस्टेनेबिलिटी को भी कंपनी ने प्रमुख प्राथमिकता बताया है। इसके तहत फ्यूल-एफिशिएंट एयरक्राफ्ट, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), इलेक्ट्रिक वाहनों और कार्बन-न्यूट्रल सुविधाओं समेत उत्सर्जन कम करने वाली पहलों में निवेश किया जा रहा है।

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