सुरों से रचनात्मकता, कैमरे से कहानी और मंच पर दिखा आत्मविश्वास

आईआईएमटी विश्वविद्यालय की तीन दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों ने सीखा संगीत, नृत्य, अभिनय, मॉडलिंग और सिनेमैटोग्राफी का हुनर

मेरठ। ‘सीखिए, प्रयोग कीजिए और अपनी पहचान बनाइए’ की सोच के साथ आईआईएमटी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड मास कम्युनिकेशन के डिपार्टमेंट ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन ने ‘ग्लैमर, ग्रूव और ग्रिड : संगीत, छायांकन, अभिनय एवं मॉडलिंग’ विषय पर तीन दिवसीय रचनात्मक एवं व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने संगीत की लय, नृत्य की अभिव्यक्ति, कैमरे की भाषा और मंचीय आत्मविश्वास का व्यावहारिक अनुभव लिया।

कार्यशाला के पहले दिन सिंगर, राइटर, एक्टर एवं डायरेक्टर साद रजी ने विद्यार्थियों को भारतीय और पश्चिमी संगीत की विविधताओं से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि संगीत केवल आवाज का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं और अभिव्यक्ति को व्यक्त करने की कला है। उन्होंने रियाज, नियमित अभ्यास, आवाज पर नियंत्रण और प्रस्तुति के दौरान आत्मविश्वास की तकनीकों की जानकारी दी। स्वयं गीत प्रस्तुत कर उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत की बारीकियों का अनुभव कराया।

दूसरे दिन कोरियोग्राफर एवं निदेशक, प्राणवी मीडिया डॉ. काव्य कौशिक ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मूल अवधारणाओं के साथ भाव, मुद्रा, शारीरिक संतुलन और अभिव्यक्ति का महत्व समझाया। विद्यार्थियों को कॉन्टेम्पररी डांस, बॉडी मूवमेंट, एक्सप्रेशन और स्टेज प्रेजेंस का भी प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों ने अभ्यास के माध्यम से विभिन्न तकनीकों को सीखा और मंच पर झिझक छोड़कर प्रयोग करने का अनुभव प्राप्त किया।

अंतिम दिन म्यूजिक डायरेक्टर, ऑडियो इंजीनियर एवं डायरेक्टर अनुज गुप्ता ने विद्यार्थियों को मनोरंजन उद्योग के रचनात्मक और व्यावसायिक पक्ष की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मनोरंजन उद्योग में अभिनय और संगीत के अलावा कंटेंट क्रिएशन, फिल्म निर्माण, डिजिटल मीडिया, प्रोडक्शन और उद्यमिता के भी अवसर हैं। फिल्मों एवं दृश्य उदाहरणों के जरिए उन्होंने सिनेमैटोग्राफी, फ्रेमिंग और कैमरे के माध्यम से कहानी कहने की तकनीक समझाई।

सीखने के साथ मिला प्रयोग का मंच

कार्यशाला की खासियत इसका प्रायोगिक स्वरूप रहा। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में गायन, नृत्य, अभिनय, मॉडलिंग और कैमरे के साथ प्रयोग किया। उन्हें रचनात्मकता, तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और वास्तविक परिस्थितियों में काम करने के अनुभव का महत्व समझ आया।

विभागाध्यक्ष डॉ. पृथ्वी सेंगर ने विशेषज्ञों का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे व्यावहारिक अनुभव विद्यार्थियों के कौशल और पेशेवर समझ को मजबूत करते हैं। वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र कुमार मिश्रा ने विशेषज्ञों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

कार्यशाला के आयोजन में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंकज सोनी, डॉ. शाहबाज खान, डॉ. ज्योत्सना सिन्हा, तनु शर्मा, फोटोग्राफर संजय सिंह, ज्ञान प्रकाश और शिवानी मांगवानी का सहयोग रहा।

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