शिशु को जन्म के बाद शुरुआती छह माह तक केवल मां का दूध देना चाहिए
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यक्रम
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के बाल एवं शिशु रोग विभाग तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश एनएनएफ (NNF) और आईएपी (IAP) के तत्वावधान में बाल एवं शिशु रोग विभाग में हुआ।
सप्ताहभर चले अभियान में नुक्कड़ नाटक, सेमिनार, पोस्टर प्रस्तुति और पैनल डिस्कशन के माध्यम से माताओं एवं उनके परिजनों को नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व की जानकारी दी गई। नुक्कड़ नाटक के जरिए सरल तरीके से बताया गया कि मां का दूध शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम का नेतृत्व बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विजय जायसवाल एवं डॉ. अनुपमा वर्मा ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. अमित उपाध्याय, सचिव एनएनएफ एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ, ने कहा कि शिशु को जन्म के बाद शुरुआती छह माह तक केवल मां का दूध देना चाहिए। इसके बाद दो वर्ष की आयु तक उपयुक्त पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना लाभकारी है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शकुन सिंह और डॉ. अनुपम रानी ने गर्भवती महिलाओं, नवजात माताओं तथा उनके परिजनों को स्तनपान के स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी। डॉ. शकुन सिंह ने बताया कि मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और उसे संक्रमणों से बचाने में मदद करता है। उन्होंने छह माह तक केवल स्तनपान कराने की सलाह दी।
डॉ. अनुपम रानी ने बताया कि स्तनपान से मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है तथा मातृ स्वास्थ्य के लिए भी इसके कई लाभ हैं। कार्यक्रम में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया और माताओं को शिशु को सही तरीके से स्तनपान कराने की जानकारी दी।
कार्यक्रम में डॉ. प्रियंका गुप्ता, डॉ. नीलम गौतम, डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. मुनेश तोमर, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. रवि सिंह चौहान, डॉ. आयशा सैफी, डॉ. सुरुचि, डॉ. तूबा कमर और डॉ. शिवम शर्मा सहित रेजिडेंट चिकित्सक, एमबीबीएस छात्र-छात्राएं, नर्सिंग स्टाफ तथा बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन मौजूद रहे।


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