शिवभक्ति का स्वरूप यह भी! पूर्व मुस्लिम शिवभक्त कांवड़ियों का जत्था बना आकर्षण का केंद्र
मेरठ। सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार आस्था का एक अलग स्वरूप देखने को मिला। हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के प्रसिद्ध दूधेश्वर महादेव मंदिर की ओर जा रहे स्वयं को पूर्व मुस्लिम बताने वाले 50 से अधिक शिवभक्तों का जत्था रविवार को चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग से होकर गुजरा। जत्थे को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ियों का स्वागत किया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण शिवमय हो गया।
अप्रैल में पत्नी और बच्चों के साथ अपनाया सनातन धर्म
जत्थे में सहारनपुर निवासी शहजाद अब शंकर और उनकी पत्नी रजिया अब सावित्री के नाम से जानी जाती हैं। दोनों पहली बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। शंकर के अनुसार, उन्होंने अप्रैल 2026 में पत्नी और तीन बच्चों के साथ स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया। इसके बाद भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था और गहरी हुई और उन्होंने पहली बार कांवड़ यात्रा करने का संकल्प लिया।
शंकर का कहना है कि धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें समाज में अपनापन, सम्मान और सहयोग मिला, जिससे उनकी आस्था और मजबूत हुई। उन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लेकर दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने का संकल्प लिया है।
2025 में सनातन धर्म अपनाने वाले राजन कर रहे नेतृत्व
जत्थे का नेतृत्व बिजनौर निवासी सरफराज उर्फ इमरोज आलम, जो अब राजन नाम से जाने जाते हैं, कर रहे हैं। राजन ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025 में सनातन धर्म अपनाया था। सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विचारों और परंपराओं से प्रभावित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया। भगवान आशुतोष के प्रति श्रद्धा ने उन्हें कांवड़ यात्रा के लिए प्रेरित किया।
1 अगस्त को हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा
50 से अधिक शिवभक्तों का यह जत्था एक अगस्त को हरिद्वार की हरकी पैड़ी से रवाना हुआ। तीन दिवसीय यात्रा के दौरान कांवड़िये गंगाजल लेकर गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे और वहां भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। जत्थे के साथ एक कार भी चल रही है। मेरठ के कांवड़ पटरी मार्ग से गुजरने के दौरान यह जत्था श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बना रहा।


No comments:
Post a Comment