ड्रोन, मिसाइल और तेल ठिकाने बने निशाना
पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव; ईरान के पलटवार से खाड़ी देशों में चिंता
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की ओर से कुवैत और इराक समेत क्षेत्र के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावे सामने आए हैं। इससे खाड़ी देशों में सुरक्षा और ऊर्जा ढांचे को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से उत्तरी कुवैत में कैंप उदैरी, बुबियन द्वीप और अली अल सलेम एयरबेस के आसपास हमले किए गए। इन इलाकों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात होने की बात कही जाती है। हमलों के बाद कुवैत में एयर डिफेंस को सक्रिय किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर भी खतरा
तनाव का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। इराक के अल-अहदाब ऑयल फील्ड और एरबिल क्षेत्र में ड्रोन हमलों के दावे किए गए हैं। रिपोर्टों में तेल भंडारण और रिफाइनरी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
यदि संघर्ष ऊर्जा प्रतिष्ठानों तक फैलता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के प्रमुख तेल और गैस आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है, इसलिए यहां किसी बड़े सैन्य टकराव से वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है।
कई ऊर्जा ठिकानों को लेकर चेतावनी
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान की धमकियों के दायरे में सऊदी अरब के घवार, अबकैक और खुरैस जैसे तेल प्रतिष्ठान, यूएई के रुवैस और जकुम, कतर का नॉर्थ फील्ड और रास लाफान एलएनजी परिसर तथा कुवैत का बुरगन ऑयल फील्ड शामिल हैं। हालांकि, इन सभी ठिकानों पर हमले किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान की ओर से कथित तौर पर यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि उसके दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर हमला हुआ तो वह खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर जवाब देगा।
लाल सागर में भी बढ़ी सक्रियता
तनाव का असर समुद्री मार्गों पर भी पड़ रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों के मार्ग प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका के अगले कदम पर नजर
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लेकर दिए गए बयानों के बाद अमेरिका की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर है। अमेरिकी और इजराइली कार्रवाई की संभावनाओं से जुड़े दावे भी सामने आए हैं, हालांकि किसी संभावित बड़े हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मौजूदा घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।


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