नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति : प्रो. हरे कृष्णा
सीसीएसयू में पीएम मोदी का लाइव संबोधन सुना, छात्रों ने लिया नशे से दूर रहने का संकल्प
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेता जी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव संबोधन को सामूहिक रूप से सुना। प्रधानमंत्री के संदेश से प्रेरित होकर सभी ने नशामुक्त भारत के निर्माण और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ललित कला विभाग के विद्यार्थियों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी के अवलोकन से हुई। चित्रों और कलाकृतियों के जरिए विद्यार्थियों ने नशे के दुष्परिणामों और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। प्रदर्शनी को अतिथियों और विद्यार्थियों ने सराहा।
नशा शरीर के साथ समाज को भी करता है प्रभावित
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रवि राणा ने नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति को भी प्रभावित करता है। तंबाकू, शराब और अन्य मादक पदार्थ हृदय, फेफड़े, यकृत, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। नशे की लत सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करने के साथ मानसिक तनाव, अवसाद, हिंसक प्रवृत्ति, सड़क दुर्घटनाओं और सामाजिक अपराधों का कारण बन सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से खुद नशे से दूर रहने और मित्रों व परिवार के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की अपील की। कहा कि युवाओं की ऊर्जा शिक्षा, खेल, शोध और नवाचार में लगेगी तो भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
नाटक से दिया नशे के खिलाफ संदेश
विद्यार्थियों ने नशे के दुष्परिणामों पर आधारित प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति दी। नाटक के माध्यम से बताया गया कि नशा व्यक्ति के सपनों, परिवार की खुशियों और समाज के भविष्य को बर्बाद कर देता है। सांस्कृतिक नृत्य के जरिए स्वस्थ जीवन, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कार्यवाहक कुलपति प्रो. हरे कृष्णा ने कहा कि भारत का भविष्य युवा हैं। युवा नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रहेंगे तो विकसित भारत का सपना जल्द साकार होगा। विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना विकसित करने का भी माध्यम है। युवाओं को अपनी ऊर्जा अनुसंधान, नवाचार, खेल और समाजसेवा जैसे सकारात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नशा प्रतिभा और क्षमता को समाप्त करता है, जबकि अनुशासन, परिश्रम और स्वस्थ जीवनशैली सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अधिकारियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण, स्वयं नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने की शपथ ली। राष्ट्रहित एवं जनकल्याण के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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