मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए तैयार होगा प्रभावी रोडमैप 

  जिलों से एक सप्ताह में मांगे गए सुझाव     

  विकास भवन में सीडीओ की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन     

   मेरठ । मातृ मृत्यु दर  किसी भी समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं उनके प्रभावी उपयोग का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। नवीनतम सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (2022-24) के अनुसार उत्तर प्रदेश का मातृ मृत्यु अनुपात 141 से बढ़कर 154 हो गया है, जिसे गंभीर चिंता का विषय मानते हुए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश ने इसे विशेष अभियान के लिए चयनित किया है।इसी परिप्रेक्ष्य में सोमवार को विकास भवन के सम्मेलन कक्ष में सीडीओ नूपुर गोयल की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया।                                                                                                                                                                                                                                                         जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बैठक में शिरकत की। बैठक में सीडीओ ने शासन से मिले दिशा निर्देश के बाद अधिकारियों से सुझाव मांगे कि कैसे मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। सीडीओ ने एक सप्ताह में अधिकारियों से सुझाव देने के लिए कहा है।  ताकि आवश्यक संशोधन के बाद इसे अंतिम रूप दिया जा सके।सीडीओ सुझाव देते हुए   कहा कि जिला महिला चिकित्सालय तथा अन्य फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन कॉल सेंटरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) मामलों की नियमित निगरानी और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। जोर दिया गया कि अधिक से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र पर गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण कराया जाए। 

 नोडल अधिकारी ने सीडीओ को बताया कि  पिछले एक वर्ष में सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा जनपद में स्थित सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों तथा जिला स्तरीय बड़े अस्पतालों में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं भी चिन्हित की गई हैं। प्रस्तावित रोडमैप के माध्यम से जिलों को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा मातृ मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाने के लिए नए हस्तक्षेपों की पहचान करने में सहायता मिलेगी।बैठक में सीएमओ डा़. राम प्रसाद, एसीएमओ डा राजेश कुमार, डीपीएम हरपाल सिंह, डेम शिव महेन्द्र , जिला माृत परार्मश दाता इलमा अज़ीम आदि मौजूद रहे।

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