भरत तिवारी एनकाउंटर केस में परिवार को नौकरी और मुआवजा
बिहार सरकार का बड़ा ऐलान, पीड़ित परिवार के एक सदस्य को मिलेगी सरकारी नौकरी; न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला
पटना। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को कहा कि न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही परिवार को आर्थिक मुआवजा भी दिया जाएगा। हालांकि, मुआवजे की राशि कितनी होगी, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
17 जून को हुई थी भरत तिवारी की मौत
भरत तिवारी की 17 जून 2026 को मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान उन्हें गोली लगी थी। मामले के बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे।
भरत तिवारी को तीन गोलियां लगने की बात सामने आई थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने की पुष्टि होने का दावा किया गया। मामले में गोली चलाने वाले एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह गिरफ्तारी 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिवार की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद हुई थी।
रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच आयोग
परिवार की मांग के बाद बिहार सरकार ने मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग मामले से जुड़े तथ्यों और पुलिस कार्रवाई की जांच कर रहा है।
जांच आयोग के सामने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और मां आशा देवी के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अलावा भरत तिवारी के परिजनों और उनके भाई का बयान भी आयोग के समक्ष दर्ज किया गया है।
अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है। सरकार के इस ऐलान के बाद परिवार को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नौकरी पाने वाले परिवार के सदस्य और मुआवजे की राशि को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।


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