नेपाल में बाढ़ की तबाही: 359 मौतें, सैकड़ों लापता; राहत-बचाव अभियान तेज

काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। भोटे कोशी नदी में आए तेज सैलाब ने कई गांवों, घरों, वाहनों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 359 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। अचानक पानी बढ़ने के कारण लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। सेना ने अभियान के लिए 14 हेलीकॉप्टर और आपदा राहत दल तैनात किए हैं।

सैकड़ों लोगों से संपर्क टूटा

नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, सीमा क्षेत्र में आई बाढ़ के 24 घंटे से अधिक समय बाद भी 823 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया। इनमें कम से कम 579 पर्यटक शामिल हैं। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है, क्योंकि अलग-अलग समय पर आंकड़े अपडेट किए जा रहे हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति राहत-बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार, नेपाली सेना के अभियान में रसुवा के तिमुरे से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा एक सुरंग में फंसे सात नेपाली नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि भारत नेपाल सरकार के साथ मिलकर लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने में जुटा है। भारत की ओर से प्रभावित क्षेत्रों के लिए 10 टन राहत सामग्री और जरूरी दवाएं भेजी गई हैं। राहत अभियान के लिए भारतीय वायुसेना का C-130J विमान भी नेपाल भेजा गया है।

भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा बनी चिंता

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटकों के संपर्क से बाहर होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। गुजरात के आणंद जिले के रहने वाले बिमलभाई पटेल और जेमीनाबेन पटेल भी नेपाल यात्रा के दौरान लापता बताए जा रहे हैं। दोनों लंबे समय से अमेरिका में रह रहे थे और भारत आने के बाद नेपाल घूमने गए थे।

वहीं, कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया कोलकाता का 32 सदस्यीय दल भी बाढ़ के दौरान संपर्क से बाहर हो गया था। दल में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल थे।

आपदा की वजह पर उठे सवाल

रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास 26 अगस्त की सुबह 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसके बाद ग्लेशियर या चट्टानी हिस्से के ढहने और अचानक पानी बढ़ने की घटनाओं को बाढ़ की तबाही से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, आपदा के सटीक कारण और घटनाक्रम की वैज्ञानिक जांच अभी जारी है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

भारत ने नेपाल को राहत सामग्री और दवाओं के साथ मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। भारतीय टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर खोज और बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर और अन्य साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस बीच बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने भी नेपाल की त्रासदी पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। राहत और बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

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