गोवा की 11 नगर परिषदों के चुनाव जल्द कराने का आदेश, हाईकोर्ट ने 9 सितंबर तक परिसीमन पूरा करने को कहा

पणजी। गोवा की 11 नगर परिषदों के लंबित चुनावों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार स्थानीय निकाय चुनाव की तारीख तय नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति हितेन वेणुगावकर की खंडपीठ ने निमेसिया फलेरो बनाम गोवा सरकार एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि 9 सितंबर 2026 तक अंतिम परिसीमन अधिसूचना जारी की जाए। इसके बाद आरक्षण संबंधी अधिसूचनाएं जारी कर चुनाव प्रक्रिया को न्यूनतम संभव वैध अवधि में पूरा किया जाए।

पांच साल की संवैधानिक अवधि का हवाला

मामले में दायर याचिकाओं में गोवा म्यूनिसिपैलिटीज (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026 को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नगर परिषदों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई वैधानिक व्यवस्था लागू करने के नाम पर चुनाव टालना संविधान के अनुच्छेद 243U में निर्धारित पांच साल की अवधि के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने हालांकि अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, लेकिन कहा कि नए कानून या चुनावी प्रक्रिया को लागू करने के नाम पर चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाले जा सकते। विधायिका को नगर निकाय कानूनों में संशोधन का अधिकार है, लेकिन इससे संवैधानिक चुनावी समयसीमा खत्म नहीं होती।

मार्च से मई के बीच खत्म हुआ कार्यकाल

गोवा की कई नगर परिषदों का पांच साल का कार्यकाल मार्च से मई 2026 के बीच समाप्त हो चुका है। कार्यकाल पूरा होने के बाद इन निकायों के संचालन के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय निकायों का लोकतांत्रिक नवीनीकरण अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता।

अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि वह वैध कानूनों की अनदेखी कर सकता है। सभी संबंधित संस्थाओं को इस तरह काम करना होगा कि संवैधानिक समयसीमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।

चुनाव प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार, संबंधित विभागों और राज्य निर्वाचन आयोग को परिसीमन, आरक्षण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करनी होंगी। अदालत ने साफ किया कि संवैधानिक समयसीमा से विचलन केवल उतनी अवधि तक हो सकता है, जितनी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए वास्तव में आवश्यक हो।

इस आदेश से गोवा की 11 नगर परिषदों के चुनाव का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम कब घोषित करता है।

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