रिश्वत लेते पकड़ी गईं डेयरी संस्थान की प्रिंसिपल, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजीं

3.85 लाख रुपये का बिल पास करने के बदले 1.50 लाख रुपये मांगने का आरोप; एंटी करप्शन टीम ने 1.35 लाख की रिश्वत लेते किया था गिरफ्तार

मेरठ। मेरठ सहकारी डेयरी प्रशिक्षण संस्थान एवं शोध केंद्र की प्रिंसिपल वंदना सिंह को एंटी करप्शन कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने उन्हें कचहरी परिसर स्थित कोर्ट में पेश किया था। बचाव पक्ष की ओर से जमानत की अर्जी दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

गिरफ्तारी के बाद वंदना सिंह जब कोर्ट पहुंचीं तो उन्होंने दुपट्टे से अपना चेहरा ढक रखा था। इस दौरान उनके परिवार के कई लोग भी कोर्ट परिसर में मौजूद रहे।

बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप

गंगानगर निवासी अमित सिवाच सहकारी डेयरी प्रशिक्षण संस्थान एवं शोध केंद्र में ठेके पर कैंटीन चलाते हैं। कैंटीन में केंद्र पर आने वाले किसानों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। अमित का करीब 3.85 लाख रुपये का बिल लंबित था।

आरोप है कि बिल पास कराने के एवज में प्रिंसिपल वंदना सिंह ने उनसे 1.50 लाख रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ज्यादा दबाव बनाने पर उन्हें कैंटीन में खाने के सामान में छिपकली निकलवाने और ठेका निरस्त कराने की धमकी भी दी गई।

शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप

अमित सिवाच के मुताबिक, उन्होंने पहले मामले की शिकायत सीबीआई से की थी। वहां से मामला एंटी करप्शन टीम को भेजा गया। इसके बाद उन्होंने लिखित शिकायत दी। शिकायत की जांच के बाद टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की।

आरोप के मुताबिक, 1.50 लाख रुपये की मांग के बाद 1.35 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। मंगलवार को एंटी करप्शन टीम ने केमिकल लगे नोट शिकायतकर्ता को दिए। जैसे ही वंदना सिंह ने रकम अपने हाथ में ली, टीम ने उन्हें पकड़ लिया।

वीडियोग्राफी को लेकर कोर्ट में बहस

कोर्ट में सुनवाई के दौरान वंदना सिंह की ओर से अधिवक्ता अमित दीक्षित ने पक्ष रखा और रिमांड का विरोध किया। बचाव पक्ष ने ट्रैप कार्रवाई की वीडियोग्राफी नहीं कराए जाने का मुद्दा भी उठाया।

इसके जवाब में सरकारी पक्ष ने एफआईआर का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

सरकारी वकील बोले- नियमानुसार हुई कार्रवाई

एंटी करप्शन कोर्ट के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत मंजूर कर ली है। उन्होंने कहा कि आरोपी पक्ष की ओर से वीडियोग्राफी नहीं होने की बात कही गई थी, लेकिन एफआईआर में कार्रवाई का विवरण स्पष्ट है। कोर्ट ने सरकारी पक्ष की दलीलें स्वीकार करते हुए रिमांड मंजूर कर लिया।

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