आपदा प्रबंधन और हम
इलमा अज़ीम
किसी भी देश के लिए प्राकृतिक आपदाएं मुसीबत होती हैं, बेशकीमती जानें चली जाती हैं, संपत्ति का भारी नुकसान होता है, पशु धन नष्ट हो जाता है। इतना धक्का लगता है कि उससे उबरने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन ऐसे अवसरों पर वही देश सफल होते हैं जिनका आपदा प्रबंधन उत्कृष्ट दर्जे का होता है। अतीत में देश ने बहुत नुकसान झेला, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन जैसी आपदाओं में हजारों जानें जाती थीं और बड़े पैमाने पर आर्थिक क्षति भी होती थी।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सरकार ने बड़े पैमाने पर व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। इसके तहत आपदा प्रबंधन की सोच बदल गई है। अब आपदा आने के बाद राहत देने की बजाय पहले से ही तैयारी की जाती है ताकि नुकसान कम से कम हो। मानसून के दौरान बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ी तीव्रता के बीच, आपदा प्रबंधन सुशासन का एक महत्वपूर्ण आधार बन गया है। सरकार ने आपदा प्रबंधन के तहत संपूर्ण राष्ट्र का दृष्टिकोण अपनाया है।
इसके अलावा तुर्की में आए भारी भूकंप और सीरिया के लिए चलाए गए राहत ऑपरेशन ने आपदा राहत प्रबंधन के मामले में भारत को दुनिया के शीर्ष राष्ट्रों में ला खड़ा किया। आपदा प्रबंधन के मामलों में भारतीय थल सेना, भारतीय वायु सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों में मिलकर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
यह पहल एनडीएमए के सहयोग से लागू की जा रही है। सभी मौसम संबंधी अर्ली वार्निंग सिस्टम में सुधार आया है। पहले जहां पूर्व चेतावनी संदेश 3 से 5 दिन पहले भेजे जाते थे, अब 7 दिन पहले ही भेज दिए जाते हैं, ताकि अधिकारी व्यवस्था कर सकें।





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