राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस कार्यशाला में सतत विकास के लिए विज्ञान और नवाचार पर मंथन
मेरठ। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) तथा इस्कॉस के तत्वावधान में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की उत्तर प्रदेश पश्चिमांचल क्षेत्रीय रिसोर्स टीचर्स की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भारत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेरठ में किया गया। कार्यशाला में मेरठ एवं सहारनपुर मंडल के नौ जिलों से आए मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में 'सतत विकास के लिए विज्ञान और नवाचार' विषय पर अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, ऊर्जा स्रोतों का अन्वेषण, स्वास्थ्य, कृषि तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैज्ञानिक उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की मार्गदर्शिका एवं पोस्टर का भी विमोचन किया गया।
राज्य समन्वयक दीपक शर्मा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है, ताकि वे स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस जमीनी स्तर पर भविष्य के वैज्ञानिक तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है।
कार्यक्रम का शुभारंभ बीआईटी के निदेशक डॉ. कमलेश कुमार राणा, रजिस्ट्रार आदेश कुमार गहलोत, राज्य समन्वयक दीपक शर्मा तथा सुनील बंसल ने दीप प्रज्वलित कर किया। संचालन डॉ. सरिता सिंह ने किया। कार्यशाला में डॉ. रजनी जैन, डॉ. सुमित रोहिल्ला, डॉ. सरिश्त यादव, सोनू सिंघल एवं महेश वर्मा ने प्रतिभागियों को स्थानीय समस्याओं की पहचान और वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों से अपने-अपने जनपदों में विज्ञान शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को इस अभियान से जोड़ने का आह्वान किया गया। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।


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