नई आणविक जांच तकनीक से 60 मिनट में मिलेगा सटीक परिणाम
एंकर डायग्नोस्टिक्स (जर्मनी) और डायग्नोमेड इंडिया के वैज्ञानिक सम्मेलन में तकनीक का प्रदर्शन
नई दिल्ली। जर्मनी की एंकर डायग्नोस्टिक्स और डायग्नोमेड इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में "नवाचार एवं वैश्विक साझेदारी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा" विषय पर वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में अत्याधुनिक आणविक निदान (मॉलिक्यूलर वर्कफ़्लो) तकनीक का प्रदर्शन किया गया, जो 60 मिनट से कम समय में सटीक एवं विश्वसनीय जांच परिणाम देने में सक्षम है। विशेषज्ञों ने इसे संक्रामक रोगों की त्वरित पहचान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
सम्मेलन का उद्देश्य भारत में आधुनिक आणविक जांच तकनीकों को बढ़ावा देना तथा भारत-जर्मनी के बीच स्वास्थ्य एवं वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना था।
जर्मनी से आए एंकर डायग्नोस्टिक्स के प्रबंध निदेशक एवं सह-संस्थापक थॉमस ग्रेविंग तथा बिक्री एवं विपणन प्रमुख डॉ. टोबियास रुक्स ने नवीन आणविक निदान तकनीकों, संक्रामक रोगों की शीघ्र पहचान और भविष्य की स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों पर विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनेगी।
कार्यक्रम की मेजबानी डॉ. मोहम्मद इंतखाब आलम ने की, जबकि समन्वय डॉ. मशूक अली ने किया। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक जांच तकनीकें रोगों की शीघ्र पहचान और सटीक उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। सम्मेलन के आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ता जैस्मिन सिंह की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सम्मेलन में डॉ. नमिता डी'सूज़ा डावर, डॉ. अर्चना सिंह और डॉ. मुजाहिद मंजर वजीदी सहित देश के कई विशेषज्ञों ने आधुनिक आणविक निदान, संक्रमण नियंत्रण और परिशुद्ध चिकित्सा पर विचार साझा किए। देशभर से आए चिकित्सकों, पैथोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार एवं वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।


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