अच्छा लीडर टीम की क्षमता पहचानकर सही जिम्मेदारी सौंपता है : रमेश शर्मा

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए शुरू की गई मासिक व्याख्यानमाला के प्रथम व्याख्यान में वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि एक सफल नेता वही होता है, जो अपनी टीम के प्रत्येक सदस्य की क्षमता और गुणों को पहचानकर उसके अनुरूप जिम्मेदारी सौंपे। उन्होंने 'रामायण : कुशल नायक की कथा' विषय पर व्याख्यान देते हुए भगवान श्रीराम और हनुमान के नेतृत्व गुणों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि हनुमान जी की असाधारण क्षमता को श्रीराम ने पहचाना और उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे। हनुमान जी ने सदैव अपने नायक के आदेशों का पालन करते हुए उन्हें प्रभावी ढंग से पूरा किया। उन्होंने कहा कि हनुमान माता सीता को लंका से वापस ला सकते थे, लेकिन श्रीराम ने उन्हें केवल सीता की खोज का दायित्व दिया था, इसलिए उन्होंने उसी सीमा में रहकर कार्य किया और लंकादहन के माध्यम से रावण को श्रीराम की शक्ति का भी एहसास कराया।

रमेश शर्मा ने कहा कि एक अच्छे नेता को शांत स्वभाव का होना चाहिए और क्रोध से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि रामचरितमानस में हनुमान जी के व्यक्तित्व से धैर्य, संयम, ज्ञान और शक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने व्यक्तित्व विकास के लिए नियमित व्यायाम, ज्ञानार्जन और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि रामचरितमानस की प्रताप भानु और कालनेमि की कथाएं जीवन में छल-प्रपंच से सावधान रहने का संदेश देती हैं। साथ ही, भगवान श्रीराम का जीवन सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, दायित्वबोध और सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि इस व्याख्यानमाला का उद्देश्य शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बौद्धिक विकास के लिए नेतृत्व क्षमता, समय प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, विज्ञान, इतिहास, भारतीय संस्कृति और महान विभूतियों के जीवन जैसे विषयों पर नियमित संवाद स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि इस शृंखला में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. (डॉ.) पी. शशिकला ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह राजपूत ने किया।

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