मॉरीशस में उर्दू साहित्य पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

सीसीएसयू के उर्दू विभाग के ऑनलाइन आयोजन में छह देशों के विद्वानों ने रखे विचार

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग एवं आयुसा के संयुक्त तत्वावधान में "मॉरीशस में उर्दू साहित्य" विषय पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में भारत, मॉरीशस, कनाडा, नेपाल, सऊदी अरब और कश्मीर सहित विभिन्न देशों एवं क्षेत्रों के विद्वानों ने सहभागिता कर उर्दू भाषा और साहित्य के विकास पर अपने विचार रखे।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रख्यात साहित्यकार एवं आलोचक प्रो. सगीर अफ़राहीम ने कहा कि मॉरीशस उर्दू साहित्य का महत्वपूर्ण केंद्र है। वहां हिंदी और उर्दू अलग नहीं हैं तथा दोनों भाषाओं के शिक्षक मिलकर भाषा और साहित्य के विकास में योगदान दे रहे हैं।

कार्यक्रम के संरक्षक एवं उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य मॉरीशस में उर्दू भाषा एवं साहित्य के विकास की यात्रा को समझना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तुत शोध-पत्रों का प्रकाशन भी कराया जाएगा।

प्रसिद्ध दास्तानगो जावेद दानिश ने कहा कि मॉरीशस में उर्दू के प्रति लोगों का उत्साह प्रेरणादायक है। वहीं प्रो. मोहम्मद काज़िम ने कहा कि वहां प्रत्येक विद्यालय में उर्दू पढ़ाई जाती है और पीएचडी स्तर तक इसकी शिक्षा उपलब्ध है।

प्रो. अनवर पाशा ने कहा कि मॉरीशस साझा संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है और वहां के लोगों का उर्दू से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मुख्य अतिथि डॉ. आसिफ अली आदिल अली मोहम्मद ने कहा कि मॉरीशस में उर्दू धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है तथा उसका शिक्षण सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है।

संगोष्ठी में डॉ. नाज़िया बेगम जाफ़ो ख़ान, डॉ. महरीन क़ादिर हुसैन और डॉ. सकीना बहादुर ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का शुभारंभ सईद अहमद ने पवित्र कुरआन के पाठ से किया। स्वागत भाषण फरहत अख्तर, संचालन डॉ. इरशाद स्यानवी तथा धन्यवाद ज्ञापन एम.ए. उर्दू की छात्रा महविश ने किया।

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