मेरठ की झुग्गी से चल रहा था ₹357 करोड़ का टैक्स फ्रॉड; आयकर विभाग ने किया भंडाफोड़
धारा 80GGC का गलत इस्तेमाल कर 3000 क्लाइंट्स को दिलाया ₹65.5 करोड़ का फर्जी रिफंड, ₹4 करोड़ की FD जब्त
विशेष संवाददाता, मेरठ
मेरठ में आयकर विभाग ने देशव्यापी टैक्स रिफंड धोखाधड़ी के एक बहुत बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल को मेरठ की एक झुग्गी में स्थित 225 स्क्वायर फीट के मकान से एक 30 वर्षीय महिला द्वारा अंजाम दिया जा रहा था। आरोपित नैन्सी अग्रवाल ने कथित रूप से आयकर प्रणाली की कमियों का फायदा उठाकर देश भर के करीब 3,000 से अधिक क्लाइंट्स के लिए ₹357 करोड़ की फर्जी कटौती (डिडक्शन) और छूट का जुगाड़ किया। इसके जरिए वह लगभग ₹65.5 करोड़ का अवैध टैक्स रिफंड हासिल करने में कामयाब रही।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपित महिला एक छोटी सी फर्म में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर चुकी है। उसने अपने इसी अनुभव का इस्तेमाल कर पिछले तीन सालों में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80GGC (राजनीतिक दलों को दिए गए दान पर टैक्स छूट) का व्यवस्थित तरीके से दुरुपयोग किया। उसने अपने क्लाइंट्स की तरफ से गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भारी डोनेशन देने के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
'रेफरल डिस्काउंट' से फैलाया देश भर में जाल
आयकर विभाग के अधिकारी माखन मीना ने बताया कि आरोपित नैन्सी अग्रवाल ने ग्राहकों को जोड़ने के लिए एक शातिराना नेटवर्क तैयार किया था। वह अपने मौजूदा क्लाइंट्स को प्रमोशनल और रेफरल डिस्काउंट का ऑफर देती थी, बशर्ते वे ऐसे नए वेतनभोगी (सैलरीड) कस्टमर्स लेकर आएं जो फर्जी आईटीआर (ITR) फाइल करने के लिए तैयार हों।
मंगलवार को मेरठ आयकर जांच इकाई (इन्वेस्टिगेशन यूनिट) द्वारा कई स्थानों पर की गई समन्वित छापेमारी के बाद इस करोड़ों के घोटाले का खुलासा हुआ है।
छापेमारी में बरामदगी:
विभाग द्वारा आरोपित से जुड़े चार ठिकानों पर की गई कार्रवाई और दो बैंक लॉकरों की तलाशी में ₹4 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और ₹5 लाख नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा हाथ से लिखे लेजर, कंप्यूटर, लैपटॉप और कई डिजिटल सबूत भी जब्त हुए हैं, जिनमें पूरे क्लाइंट नेटवर्क का डेटा मौजूद है।
फर्जी रिफंड लेने वाले वेतनभोगियों को भेजे जा रहे नोटिस
आयकर विभाग ने अब आरोपित महिला पर मुकदमा चलाने के साथ-साथ उन करदाताओं (टैक्सपेयर्स) से रकम वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने गलत तरीके से रिफंड का फायदा उठाया। अधिकारियों के मुताबिक, इन क्लाइंट्स में ज्यादातर सैलरी पाने वाले लोग शामिल हैं, जो अधिक रिफंड मिलने के लालच में या तो जानबूझकर या अनजाने में इस धोखाधड़ी का हिस्सा बन गए। विभाग अब इन सभी लाभार्थियों को नोटिस भेजकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।


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