अवैध कॉलोनियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेरठ के बाहरी इलाकों की मांगी रिपोर्ट
उल्देपुर में बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों पर होगी जांच, आवास विकास प्रमुख सचिव से जवाब तलब
मेरठ। शहर के बाहरी क्षेत्रों में तेजी से विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मेरठ के लावड़ रोड स्थित उल्देपुर क्षेत्र में विकसित हो रही कॉलोनियों और निर्माण कार्यों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवास विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद को निर्देश दिया है कि वह जांच कर बताएं कि मेरठ शहर के बाहरी इलाकों, विशेषकर उल्देपुर में कोई रिहायशी कॉलोनी या कच्चे मकान अवैध रूप से तो विकसित नहीं किए जा रहे हैं।
अदालत ने इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से भी आवश्यक जानकारी जुटाकर सहयोग करने को कहा है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर इन क्षेत्रों में हो रहे निर्माण की जांच तेज होने की संभावना है।
मेडा की कार्रवाई पर उठते रहे हैं सवाल
मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) लंबे समय से अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद शहर के बाहरी इलाकों में नई कॉलोनियां विकसित होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
मेडा के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में 285 कॉलोनियां ऐसी हैं जिनके मानचित्र स्वीकृत हैं, जबकि 119 कॉलोनियों का नियमितीकरण किया जा चुका है। वहीं 386 कॉलोनियां अभी भी अवैध श्रेणी में दर्ज हैं।
मेडा ने कहा- जारी रहेगी कार्रवाई
मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उल्देपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ पहले भी कई बार कार्रवाई की गई है और आगे भी अभियान जारी रहेगा।
अब सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट के बाद तय होगा कि किन अवैध निर्माणों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।


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