डिजिटल जीवन शैली और युवा

राजीव त्यागी 
तेजी से बढ़ती डिजिटल जीवन शैली युवाओं की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। अनिद्रा के शिकार युवाओं में आक्रामकता, अवसाद व आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित हो रही है। देश-दुनिया में समय-समय पर आने वाले विभिन्न सर्वेक्षण इस संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। आमतौर पर चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि किशोरों की सेहत के लिये आठ घंटे की नींद जरूरी होती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ आठ घंटे के बजाय सात-छह घंटे की नींद को भी पर्याप्त मानते हैं, बशर्ते उसमें बीच में किसी तरह का व्यवधान न हो। लेकिन बिना किसी जरूरी काम के कथित सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना आज के दौर में फैशन सा बन गया है।

 अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों में हुए हालिया शोध बताते हैं कि रात में जल्दी सोने व सुबह जल्दी उठने से बेहतर स्वास्थ्य बनता है। यह भारतीय जीवन दर्शन की अपरिहार्य धारणा भी रही है। लेकिन देश में पहले टीवी और अब मोबाइल फोन के अनियंत्रित उपयोग ने युवाओं की रात की नींद उड़ा दी है। जिसके चलते युवा पूरे दिन उखड़े-उखड़े और अशांत रहते हैं। उनमें आक्रामकता बढ़ रही है। फिर वे अवसाद के शिकार हो जाते हैं। इस स्थिति में आगे चलकर मन में आत्महत्या जैसे नकारात्मक भाव उमड़ने लगते हैं। एक सर्वे बताता है कि देश में 73 फीसदी दसवीं के छात्र आठ घंटे से कम की नींद सोते हैं। 

विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया में 60 से 70 फीसदी किशोर पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं। दरअसल, आज छात्रों पर अभिभावकों व शिक्षकों का अनुशासन कम ही चलता है। मां-बाप के टोकने पर वे दलील देते हैं कि ऑन लाइन पढ़ाई चल रही है। कोरोना संकट ने देश-दुनिया में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प तो दिया, लेकिन तमाम तरह की विसंगतियां व विकृतियां भी किशोरों के जीवन में भर दी हैं। सबसे बड़ा संकट यह है कि वे देर रात तक ऑनलाइन गेमों से जुड़े रहते हैं। रात में जाने-अनजाने दोस्त उनके सहभागी बनते हैं। जो कालांतर एक नशे की लत का रूप ले लेता है।कई घटनाओं में उनके आक्रामक व्यवहार के घातक परिणाम सामने आए हैं।

 यहां तक कि नजदीकी परिजनों की हत्या की घटनाएं भी हुई हैं। आनलाइन खेलों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे किशोरों के लिये नशा बन जाते हैं। रात का एकांत उन्हें रास आता है। जिसके चलते वे नींद की परवाह नहीं करते। युवा देर रात का एकांत तलाशते हैं ताकि परिजनों की अनुपस्थिति में वे मनमानी कर सकें। चिकित्सा विशेषज्ञ चेतावनी देते रहे हैं अनिद्रा से उच्च रक्तचाप की समस्या पैदा हो रही है। जो कालांतर हाइपरटेंशन में बदल जाती है।

दरअसल, शरीर की जैविक घड़ी के परिचालन में व्यवधान से शरीर नकारात्मक प्रतिक्रिया देता है। देर रात जागने और मोबाइल के नशे में किशोर असमय खाते-पीते हैं, जिससे उनमें मोटापे की समस्या भी घर कर रही है। यही वजह है कि अब किशोरों तक में डाइबिटीज की समस्या देखने में आ रही है। यह संकट बड़ा है और अभिभावकों व शिक्षकों को किशोरों की देर रात जागने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिये गंभीर प्रयास करने होंगे।

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