पश्चिम एशिया में महायुद्ध का विस्तार
ईरान-इजराइल जंग में कूदे हूती विद्रोही; 2000 किमी दूर से इजराइल पर दागी बैलिस्टिक मिसाइल
यरूशलेम/सना। ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष के 28वें दिन युद्ध की आग अब यमन तक फैल गई है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस जंग में सीधे तौर पर शामिल होने का ऐलान करते हुए इजराइल पर बड़ा हमला बोला है। 'टाइम्स ऑफ इजराइल' की रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने यमन से लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली एक शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल से इजराइल के दक्षिणी शहर बेर्शेबा को निशाना बनाया।
हवा में ही नाकाम हुआ हूतियों का हमला
इजराइली रक्षा बलों (IDF) के अनुसार, जैसे ही यमन की ओर से मिसाइल लॉन्च होने का पता चला, इजराइल का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया। खतरे को भांपते हुए इजराइली मिसाइल इंटरसेप्टर ने हूतियों की बैलिस्टिक मिसाइल को बीच रास्ते में ही (हवा में) नष्ट कर दिया। गनीमत रही कि इस हमले में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। मौजूदा युद्ध के दौरान यमन की धरती से इजराइल पर यह पहला सीधा हमला दर्ज किया गया है।
हूती विद्रोहियों की खुली चुनौती: 'जब तक मकसद पूरा नहीं होगा, हमले जारी रहेंगे'
यमन के हूती समूह ने इस मिसाइल हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी लेते हुए इजराइल को सीधी चेतावनी दी है। हूती प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि उनका यह सैन्य अभियान तब तक नहीं रुकेगा, जब तक उनका निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईरान के समर्थन में और इजराइल के विरोध में अपनी कार्रवाई को और तेज करेंगे।
रणनीतिक चिंता: क्या अब क्षेत्रीय युद्ध और भड़केगा?
हूतियों के इस हमले ने रक्षा विशेषज्ञों के माथे पर बल डाल दिए हैं। अभी तक यह जंग मुख्य रूप से ईरान और इजराइल के बीच सीमित थी, लेकिन यमन से मिसाइल दागे जाने का मतलब है कि अब लाल सागर (Red Sea) और अरब प्रायद्वीप का क्षेत्र भी इस युद्ध की चपेट में आ गया है। 2000 किलोमीटर की दूरी से सटीक निशाना साधने की हूतियों की क्षमता यह दर्शाती है कि उन्हें ईरान से आधुनिक मिसाइल तकनीक प्राप्त हो रही है।
दुनिया की नजरें अब इजराइल के अगले कदम पर
इजराइल पहले ही लेबनान में हिजबुल्लाह और गाजा में हमास के साथ मोर्चा खोले हुए है। अब यमन से आए इस नए खतरे के बाद इजराइल की 'वॉर कैबिनेट' की बैठक बुलाई गई है। जानकारों का मानना है कि यदि हूतियों के हमले जारी रहे, तो इजराइल यमन में मौजूद उनके ठिकानों पर हवाई हमले (Air Strikes) कर सकता है, जिससे यह संकट और अधिक गहरा सकता है।


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