केले और स्नैक प्लांट के फाइबर से तैयार की जा रही साड़ी

 मंगल पांडे नगर बुनकर सेवा केन्द्र में तैयार हो रही केले के तने से मिलने वाले फाइबर और स्नैक प्लांट के फाइबर से तैयार हो साड़ी

मेरठ। बुनकर सेवा केन्द्र किसानों व व्यापारियों के लिए नये -नये नवाचार कर रहा है। इस बार कुछ हट कर इस केन्द्र में केले के तने से मिलने वाले फाइबर और स्नैक प्लांट के फाइबर से साड़ियां बनाई जा रही हैं. खास बात यह है कि फाइबर से तैयार की जा रही साड़ी सूती साड़ियों  से बेहतर हैं। 

 मंगल पांडे नगर स्थित बुनकर सेवा केन्द्र पर काम करने वाले राज सिंह ने बताया कि  केंद्र में अलग-अलग डिजाइन पर काम किया जाता है, जिससे बुनकरों को कुछ नया करने को मिले। कुछ न कुछ डेवलपमेंट यहां किया जाता है।  जिससे बेहतरीन कपड़े तैयार कर सकें। केंद्र में केले के फाइबर को निकालने के बाद उसे जरूरत के मुताबिक नेचुरल कलर करके साड़ी बनाने के लिए उपयोग में ला रहे हैं। 

सोने-चांदी के तारों का बन रहा विकल्प 

 पहले जरी की साड़ी बनाने में सोने और चांदी के तारों का उपयोग किया जाता था, जो काफी महंगा होता था। अब केले के तने से साड़ी तैयार कर रहे हैं, जो दिखने में बिल्कुल ओरिजिनल जरी की तरह लगती है यह बेहद ही अनूठा प्रयोग है और यह प्रकृति के संपर्क में रहने का एहसास भी कराता है।  यह सोने-चांदी के तारों का विकल्प भी बन रहा है। 

गजब की है शाइनिंग और फिनिशिंग 

 बुनकर सेवा केंद्र में कार्यरत रविंद्र कुमार ने बताया, केले के फाइबर से गजब की शाइनिंग और फिनिशिंग कपड़े में आ रही है। जरी के मुकाबले यह मार्केट से काफी सस्ता है और इसे बनाना भी बेहद आसान है. जो भी बुनकर हैं उन्हें इस हुनर को सीखने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे कि भविष्य में उनके जो भी उत्पाद तैयार हों वो न सिर्फ लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर सकें, बल्कि लुभावने भी हों।

केले के तने से फाइबर निकाल कर धागा बनाया जाता है

 पश्चिम बंगाल के रहने वाले अजय विश्वास बुनकर सेवा केंद्र में कई वर्षों से कार्यरत हैं। अजय विश्वास ने बताया, केले और स्नैक फाइबर से न सिर्फ कपड़े की सुंदरता बढ़ जाती है, बल्कि खर्च भी काफी कम हो जाता है। अब तक उन्हें बाहर से जरी खरीदनी पड़ती थी, लेकिन अब अपने आसपास के वातावरण में ही मिलने वाले प्लांट से साड़ियां तैयार कर रहे हैं।

जरी साड़ी के मुकाबले काफी सस्ती है

 बुनकर सेवा केंद्र मेरठ उप निदेशक (प्रसंस्करण) तपन शर्मा ने बताया सिल्वर और गोल्ड की जरी को रिप्लेस किया जा रहा है। केले के फाइबर को निकाल कर धागों को नेचुरल डाई से रंग करके उसे साड़ियां बनाईं जा रही हैं। उसमें जो चमक आ रही है वह भी जरी के जैसी ही है। झांसी और ललितपुर में अधिकतर मध्य प्रदेश बॉर्डर के नजदीक इस तरह की चंदेरी साड़ियां बनाई जा रही हैं। 

बुनकरों को दी जा रही ट्रेनिंग 

 तपन शर्मा ने बताया, जैसे प्याज का छिलका, चाय की पत्ती, अनार के छिलके आदि केले के फाइबर को घर में ही ड्राई कर सकते हैं, इससे सिंथेटिक ड्राई से भी छुटकारा मिल जाता है। इस तरफ लगातार आगे बढ़ा जा रहा है. समर्थ प्रोग्राम के माध्यम से दो जगह पर ट्रेनिंग भी दी जा रही है। 

No comments:

Post a Comment

Popular Posts