कमी तो खलेगी
इलमा अज़ीम
बुधवार सुबह बारामती के पास हुई एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार व चालक दल के सदस्यों समेत पांच लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। महाराष्ट्र में छह बार उप मुख्यमंत्री रहे अजित पवार के राज्य में राजनीतिक योगदान को नकारा नहीं जा सकता। निश्चय ही पवार की असामयिक मृत्य ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक शून्य जरूर पैदा कर दिया है। निस्संदेह, अजित पवार जनता के नेता थे और जमीनी स्तर पर लोगों से उनका गहरा जुड़ाव था। बताया जाता है कि प्रशासनिक मामलों में उनकी समझ गहरी थी। वे वंचित वर्ग को सशक्त करने के प्रयासों के लिये जाने जाते रहे हैं।
बहरहाल, अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में उनके बदलते दांव-पेचों के लिये याद किया जाता रहेगा। उनके बारे में कहा जाता रहा है कि वे उस कहावत को हकीकत बनाते रहे हैं कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता और ना ही स्थायी दुश्मन। वे अपनों के साथ तो रहे, गैरों को भी रास आए। उन्होंने चाचा और अपने राजनीतिक गुरु शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे। शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य कहा जाता रहा है, लेकिन अजित पवार ने उनसे अलग होकर अपनी नई राह भी बनायी।
यूं तो उन्होंने चाचा शरद के साथ राजनीतिक पारी शुरू की लेकिन साल 2023 आने तक वे एकला चलो की राजनीति करने लगे। हालांकि, उन्होंने चाचा शरद पवार की छत्रछाया में राजनीति का ककहरा सीखा लेकिन एक समय वे पार्टी का सिंबल भी ले जाने में कामयाब रहे। फिर शरद पवार को नई पार्टी बनाकर उपस्थिति दर्ज करानी पड़ी। बारहवीं तक पढ़ाई के बावजूद वे अनुभवी नीतिकारों की सहायता से एक बेहतर प्रशासक भी साबित हुए। सहकारी चीनी मिलों से राजनीति की शुरुआत करने वाले पवार विधायक से लेकर सांसद तक चुने जाते रहे। वे राज्य में छह बार उप मुख्यमंत्री बने।
साल 1991 में पहली बार बारामती से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने, लेकिन चाचा शरद पवार के लिये बाद में सीट खाली भी की। वे सबसे पहले 1995 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। उनकी लोकप्रियता का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वे सात बार विधायक चुने गए। फिर वे विलासराव देशमुख की कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में पहली बार सिंचाई मंत्री बने। फिर ग्रामीण विकास मंत्री भी रहे।
बाद में वे एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन में जल संसाधन मंत्री भी रहे। साल 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद उनके अचानक भाजपा गठबंधन के साथ आने और उप मुख्यमंत्री बनने ने सबको चौंकाया था। फिर पवार साल 2023 में महायुति गठबंधन का हिस्सा बनकर पांचवीं बार उप मुख्यमंत्री बने। हालांकि, एनसीपी में विभाजन के बाद शरद पवार परिवार से संबंध बनाये रखे। इसके बावजूद कि उन्होंने एनसीपी का नाम और सिंबल तक ले लिया था। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार को कई मायनों में हमेशा याद किया जाएगा।





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