अमिताभ ठाकुर का देवरिया कोर्ट में धमाका
बोले— 'धनंजय सिंह का नाम लिया तो फंसाया', कोर्ट ने गिरफ्तारी पर पुलिस को लगाई फटकार
देवरिया। धोखाधड़ी मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की शनिवार को देवरिया के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में पेशी हुई। जमानत पर करीब आधे घंटे तक बहस चली, जिसमें लखनऊ से आए जांच अधिकारी कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके।
कोर्ट ने जांच अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे साबित हो कि अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी आवश्यक थी। जज ने जांच अधिकारी से गिरफ्तारी के आधार, साक्ष्यों की उपलब्धता और जांच की दिशा से जुड़े कई सवाल पूछे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट में बताया कि उन्हें चुनिंदा तौर पर फंसाया गया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पूर्व सांसद धनंजय सिंह और अन्य प्रभावशाली लोगों से जुड़े आरोप सार्वजनिक किए, तभी उनके खिलाफ साजिश शुरू हुई। उन्होंने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन रात करीब दो बजे उन्हें अचानक गिरफ्तार किया गया, जिससे उन्हें लगा कि उनका एनकाउंटर भी हो सकता है।
पूर्व IPS ने आरोप लगाया कि कोडीन सिरप से जुड़ा मामला केवल “बहाना” था। उन्होंने कहा कि इसमें शिवम जायसवाल सिर्फ एक प्यादा है, जबकि इसके पीछे बड़े नाम और गहरी साजिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धनंजय सिंह और कुछ बड़े माफियाओं के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उनके वकील अभिषेक शर्मा ने कहा कि गिरफ्तारी का आधार 25 साल पुराना मामला है, जिसमें अब तक कोई निर्णायक सबूत पेश नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि मामला जानबूझकर लंबित रखा गया और अब अचानक गिरफ्तारी की गई, जो न्यायसंगत नहीं है।
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर फिलहाल देवरिया जेल में हैं। शुक्रवार से उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया था, जो शनिवार को भी जारी रहा। जेल प्रशासन ने मेडिकल टीम को अलर्ट कर रखा है और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि गिरफ्तारी के समय की CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएं, ताकि कथित पुलिसिया उत्पीड़न का सच सामने आ सके। उन्होंने आरोप लगाया कि ईमानदार पूर्व IPS अधिकारी को 25-26 साल पुराने प्लॉट आवंटन मामले में जेल में बंद किया गया, जबकि बाहुबली और अवैध गतिविधियों में शामिल लोग आजाद घूम रहे हैं।
मामला 1999 से जुड़ा है। आरोप है कि अमिताभ ठाकुर ने देवरिया में औद्योगिक क्षेत्र में पत्नी नूतन ठाकुर के नाम एक प्लॉट खरीदा। इस प्लॉट का एलाटमेंट नूतन इंडस्ट्रीज के नाम पर हुआ, जबकि तीन साल तक कोई निर्माण नहीं हुआ। सितंबर 2002 में यह प्लॉट शराब और कंस्ट्रक्शन कारोबारी संजय प्रताप सिंह को ट्रांसफर कर दिया गया। इस प्रकरण में सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में FIR दर्ज की गई थी। बाद में जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।10 दिसंबर को अमिताभ ठाकुर को शाहजहांपुर से गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।


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