अयोध्या के जीएसटी अफसर प्रशांत सिंह के भाई ने खोली पोल

 बोले- "फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट पर पाई नौकरी, अब फंसने चले तो खेल रहे इमोशनल कार्ड"

अयोध्या/लखनऊ। अयोध्या में तैनात जीएसटी (GST) डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का हाई-प्रोफाइल इस्तीफा अब विवादों के भंवर में फंस गया है। जहाँ एक ओर प्रशांत सिंह इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मान में लिया गया भावनात्मक फैसला बता रहे हैं, वहीं उनके सगे बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे जांच से बचने की एक 'सोची-समझी साजिश' करार दिया है। भाई का दावा है कि प्रशांत और उनकी तहसीलदार बहन, दोनों ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की है।

शांत सिंह के बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने दस्तावेजों के साथ खुलासा किया कि प्रशांत की जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1978 है। उन्होंने 2009 में 31 साल की उम्र में मऊ सीएमओ कार्यालय से 40 फीसदी विकलांगता का प्रमाण पत्र बनवाया था। विश्वजीत के अनुसार, सर्टिफिकेट में जिस बीमारी का जिक्र है, वह उस उम्र में पूरे विश्व में किसी को नहीं होती। इसी 4 फीसदी कोटे के सहारे प्रशांत ने 2011 बैच में पीसीएस (PCS) के जरिए चयन पाया।विश्वजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने 2021 में ही इस फर्जीवाड़े की शिकायत की थी।

री-मेडिकल से भागे

 सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था (स्टेट ऑफ यूपी बनाम रविंद्र कुमार शर्मा 2016) के आधार पर सीएमओ मऊ ने मेडिकल बोर्ड गठित कर प्रशांत को कई बार बुलाया।तारीखों पर गैरहाजिरी: प्रशांत सिंह को 28 सितंबर 2021, 7 अक्टूबर 2021 और नवंबर 2022 में मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए समन जारी हुए, लेकिन वे एक बार भी हाजिर नहीं हुए।

शिकायत का दबाव

जब 13 अक्टूबर 2025 को राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने सख्त रुख अपनाया और स्वास्थ्य महानिदेशक को कार्रवाई के निर्देश दिए, तो प्रशांत सिंह को लगा कि अब बचना नामुमकिन है।

"मैनेज नहीं कर पाए तो चला इस्तीफा कार्ड"

प्रशांत के भाई का सीधा आरोप है कि वे अब तक जांच को मैनेज कर रहे थे। जब उन्हें लगा कि इस बार गर्दन फंस जाएगी और रिकवरी के साथ जेल जाना पड़ सकता है, तो उन्होंने 'इस्तीफे का इमोशनल कार्ड' खेल दिया ताकि इस्तीफा मंजूर होते ही जांच की फाइल बंद हो जाए। भाई ने यह भी खुलासा किया कि प्रशांत की छोटी बहन जया सिंह (तहसीलदार, कुशीनगर) ने भी उसी डॉक्टर से फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर नौकरी पाई है और उन पर भी जांच चल रही है।

देर रात पुलिस कस्टडी में लखनऊ ले जाए गए अफसर

मंगलवार शाम करीब साढ़े पांच बजे अयोध्या में प्रशांत कुमार के ऑफिस पर प्रशासनिक अमला (CDO, ADM और सिटी मजिस्ट्रेट) पुलिस बल के साथ पहुँचा। 5 घंटे तक चली बंद कमरे की वार्ता के बाद पुलिस प्रशांत सिंह को अपनी गाड़ी में बैठाकर लखनऊ ले गई है। सूत्रों का कहना है कि शासन इस इस्तीफे को 'असामान्य' मान रहा है और फर्जीवाड़े के एंगल पर रिपोर्ट तलब की गई है।

अमर सिंह के करीबी और छात्र नेता रहे हैं प्रशांत

आजमगढ़ निवासी प्रशांत सिंह का अतीत भी राजनीतिक रहा है। वे दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के बेहद करीबी थे और उनकी पार्टी 'राष्ट्रीय लोकमंच' के मऊ जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। छात्र राजनीति से सरकारी सेवा में आए प्रशांत अब अपनी कथित 'भक्ति' और 'भाई के आरोपों' के बीच बुरी तरह घिर चुके हैं।

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