प्रेमचंद करुणा और विचारों के साझा साहित्यकार : प्रो.राजेंद्र कुमार
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय में याद किए गए मुंशी प्रेमचंद
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सीनेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों ने कथा सम्राट व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र प्रेमचन्द को याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत उनकी प्रतिमा पर विश्विद्यालय के चीफ़ प्रॉक्टर प्रो. राकेश कुमार सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव व आलोचक प्रो. कुमार वीरेंद्र, अध्यक्ष हिंदी विभाग, रज्जू भय्या विश्वविद्यालय प्रो.आशुतोष कुमार सिंह प्रो. आशुतोष पार्थेश्वर डॉ.सूर्य नारायण, सीएमपी डिग्री कॉलेज के रसायन विज्ञान के प्रो.संतोष श्रीवास्तव, डॉ.दीनानाथ मौर्य साहित्य बड़ी संख्या में शोधार्थी व विद्यार्थी माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर की।
संगोष्ठी में आलोचक प्रो. कुमार वीरेंद्र ने प्रेमचन्द के इलाहाबाद से सम्बन्धों और चांद पत्रिका पर बात की। प्रो. राजेन्द्र कुमार अस्वस्थ होने के कारण शहर में नहीं हैं, लेकिन वे इस परिचर्चा में ऑनलाइन मोड में आभासी मंच से जुड़े। उन्होंने हजारी प्रसाद द्विवेदी के हवाले से कहा कि प्रेमचन्द करुणा और विचारों के साझा साहित्यकार हैं, उनकी रचनाओं को पढ़ते हुए आप दस मिनट रोएंगे तो दस मिनट विचार भी करना पड़ेगा।
प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने प्रेमचंद के प्रासंगिक होने और गोदान पर बात करते हुए कहा कि प्रेमचंद का लेखन आम जन का लेखन है, उनके लेखन में चरित्रों का संघर्ष है तो पारिवारिक रिश्तों में चुहलबाज़ी भी खूब है, चाहे वह गोदान में होरी और धनिया का प्रसंग हो या प्रेमचंद घर पुस्तक में शिवरानी देवी का। उनका लेखन समाज हित के साथ- साथ देश के हित में भी है।
प्रो. राकेश सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की सभी कहानियां हों या उपन्यास एक बड़ा हिस्सा व्यंग्य का है। शोधार्थियों को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। डॉ. सूर्यनारायण ने कहा कि प्रेमचन्द ने अपने लेखन के द्वारा किसी सत्ता से समझौता नहीं किया चाहे वह पारिवारिक सत्ता हो, धर्म सत्ता हो या राजनीतिक सत्ता। मानवविज्ञान के अध्यक्ष प्रो. राहुल पटेल ने कहा कि वे एक सोशल इंजीनियर हैं और उनका लेखन मानव विज्ञान को समझने में मददगार साबित होता है।
इनके अलावा प्रो. आशुतोष पार्थेश्वर, डॉ. दीनानाथ, डॉ. अंशुमान, डॉ. अवनीश , ज्ञानेंद्र द्विवेदी, संकट मोचन आर्य, नीरज यादव, नीरज विश्वकर्मा प्रदीप पार्थिव सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे और अपने विचार रखे।


No comments:
Post a Comment