तीन साल में 34 हजार  कुत्तों की नसबंदी

हर दिन 25 डॉग पकड़ते, 5 दिन निगरानी में रखने के बाद छोड़ते

मेरठ। नगर निगम ने शहर में कुत्तों के आतंक को रोकने के लिए जो रणनीति बनाई थी, उसका कोई खास असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। तीन साल में 34 हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है। लेकिन आक्रामकता उनमें जस की तस बनी है।

शहर में कुत्तों के आतंक का मामला कोई नया नहीं है। लंबे समय यह मुद्दा हंगामों की वजह बना। तीन साल पहले डॉग रेस्क्यू सेंटर बना तो बदलाव की नई उम्मीद जगी। परतापुर में यह सेंटर स्थापित हो गया, जिनमें कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण का काम किया जा रहा है। कुत्ते यहां लाए जाते हैं। उनकी नसबंदी व टीकाकरण के बाद वापस उनकी जगह पर छोड़ दिया जाता है।

एक दिन में 25 से 30 कुत्तों की नसबंदी

परतापुर के डॉग सेंटर का जिम्मा ओरैय्या की श्याम हैल्पिंग इनसाइट कंपनी पर है। कंपनी का 12 लोगों का स्टाफ है, जिनमें दो डाक्टर, एक मैनेजर, सात कर्मचारी व दो वाहन चालक हैं। यह टीम सुबह पांच बजे क्षेत्र में अभियान चलाती है। 9 बजे तक अभियान चलता है और कुत्तों को सेंटर लाया जाता है। इसके बाद सर्जरी कराई जाती है।

ऐसे किया जाता है कुत्तों का रेस्क्यू

टीम का मुख्य हथियार जाल होता है। करीब 4 लोगों की एक टीम होती है जो कुत्तों को पकड़ती है और वाहनों की मदद से डॉग सेंटर लाती है। टीम को कुत्तों को काबू करने में काफी मशक्कत करनी होती है। इसके बाद का काम सर्जरी की टीम संभालती है। सर्जरी के बाद पांच से सात घंटे लगते हैं। तीन से पांच दिन इनकी निगरानी होती है और फिर वापस छोड़ दिया जाता है।

अभियान पर एक नजर

(वित्तीय वर्ष 2024-25)

कुल टीकाकरण व नसबंदी - 9419

मेल डॉग टीकाकरण व नसबंदी - 6630

फीमेल डॉग टीकाकरण व नसबंदी - 2779

(वित्तीय वर्ष 2025-26)

अभी तक कुल टीकाकरण व नसबंदी - 3146

मेल डॉग टीकाकरण व नसबंदी - 2239

फीमेल डॉग टीकाकरण व नसबंदी - 907

खुराक का रखा जाता है पूरा ख्याल

डॉग सेंटर में प्राइवेट जैसी अस्पतालों जैसी व्यवस्था है। यहां आने वाले हर कुत्ते की खुराक व सेहत का पूरा ध्यान रखा जाता है। उनको ऐसी खुराक मिलती है जो जल्द रिकवर करने में उनको मदद करे। यह होती है एक कुत्ते की खुराक -

सुबह : पेडिग्री, दूध-ब्रैड, दलिया

दोपहर : सोयाबीन और चावल

शाम : दलिया दाल-चावल, सर्दियों में चिकन-चावल

डॉग लवर अभियान में बड़ी बाधा

एनीमल बर्थ कंट्रोल म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन मेरठ के मैनेजर केशव ठाकुर बताते हैं कि कुत्तों को पकड़ने में कई तरह की दिक्कत आती हैं। तकनीकी रूप से मजबूत टीम ही इसमें सफल होती है। इसके अलावा एक बड़ी समस्या डॉग लवर भी होते हैं जो टीम का विरोध कर देते हैं। इसके बाद अभियान रुक जाता है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts