अपने गुरुकुल में शिक्षकों के समक्ष खड़ा हैं तो बहुत प्रसन्नता हो रही है- न्यायमूर्ति पंकज मित्थल 

 मेरठ कालेज में पुरातन छात्र संगठन की ओर सेसम्मान समारोह का आयोजन 

 मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित हुए सुप्रीम कोर्ट के न्याय मूर्ति पंकज मित्थल 

मेरठ कालेज के मूट कोर्ट हाल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल का सम्मान समारोह मेरठ कॉलेज परिवार एवं पुरातन छात्र संगठन की ओर से आयोजित किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि, न्यायमूर्ति पंकज मित्थल रहे। 



 इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी, डा. ओपी अग्रवाल, डा. राम कुमार गुप्ता, एमके गुप्ता अतिथि रहे। सर्वप्रथम मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अतिथियों को शाल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। 

प्राचार्य प्रोफेसर अंजली मित्तल ने अतिथियों का स्वागत  करते हुए कहा कि कालेज अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल रहा है। पुरातन छात्र छात्राएं विभिन्न क्षेत्रों में देश सेवा कर रहे हैं। मेरठ कालेज प्रबंध समिति के अवैतनिक सचिव डा. ओपी अग्रवाल ने कहा कि कालेज के पुरातन छात्र देश सहित विश्व के अनेक देशों में कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। डा. राम कुमार गुप्ता ने कहा कि हम अपनी उपलब्धियों और गौरवमयी  परंपरा से अभिभूत हैं। राजस्थान के जालौर के जिला अधिकारी कालेज के पुरातन छात्र निशांत जैन ने कहा कि यहां उन्हें शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ विभिन्न शिक्षणेत्तर कार्यक्रमों में भागीदारी के कारण प्रशासनिक सेवा की तैयारी और आगे काफी फायदा हुआ। 

विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौरव श्याम शमशेरी ने कहा कि कॉलेज की शिक्षा ने कठिन परिस्थितियों में भी साहस के साथ खड़े होने का संबल प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। हमें सदैव सीखने को तत्पर रहना चाहिए।  उन्होंने विधि के विद्यार्थियों को सलाह दिया कि वह पुस्तक के ज्ञान के अलावा बाहरी  ज्ञान भी प्राप्त करें बहुत सारी जानकारियां हम कक्षाओं में ही प्राप्त कर सकते यदि के क्षेत्र में सफलता के लिए समाज का सर्वांगीण ज्ञान आवश्यक है। 

 सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने कहा कि वह अपने गुरुकुल में शिक्षकों के समक्ष खड़ा हैं तो बहुत प्रसन्नता हो रही है। यह सौभाग्य है कि भारत जैसे आध्यात्मिक देश में जन्म हुआ हुआ। मेरठ जैसे शहर में रहने और मेरठ कालेज में शिक्षा प्राप्त की। एक सामान्य व्यक्ति होते हुए भी आप सभी की शुभकामनाओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने का अवसर मिला। कालेज में मेरी बचपन की यादें जुड़ी हुई हैं, उस दौर में अपने पिताजी के साथ आते थे, बाद में यहा विधि की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिला। यहां परिवार जैसा माहौल मिलता है। उन्होंने कालेज के पुस्तकालय व पुस्तकों के विशाल संग्रह की प्रशंसा की। कहा कि मेरठ कालेज में सभी संसाधन उपलब्ध हैं,  किंतु नए शिक्षण संस्थानों की तरह हम अपना प्रचार-प्रसार नहीं कर रहे हैं, जिससे जनता के बीच अपनी उपलब्धियों को नहीं पहुंचा पा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि विधि की शिक्षा के अंतर्गत लीगल हिस्ट्री में वैदिक काल की न्याय प्रणाली को भी पढ़ाया जाना चाहिए। इस पर पठन-पाठन एवं शोध कार्य करें। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर निशा मनीष ने किया। आयोजन में पुरातन छात्र संगठन के सचिव प्रोफेसर प्रवीण दुबलिश, प्रोफेसर एमपी वर्मा, डा. केके मित्तल, रोहिताश्व अग्रवाल, नरेंद्र पाल सिंह,  केके शर्मा, हरिओम पवार व प्रगति रस्तोगी आदि का सहयोग रहा।

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