जैन मंदिर की रजत जयंती पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन

"एक भी बांग्लादेशी हिंद में हमको जिंदा नहीं चाहिए" - सौरभ जैन सुमन

मेरठ। दिगम्बर जैन मंदिर पल्लवपुरम के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के जाने माने कवियों ने हिस्सा लिया। कानपुर से आए वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. सुरेश अवस्थी ने शहीदों को समर्पित करते हुए पंक्तियों में कहा 

"नमन उन्हें जो राष्ट्र भक्ति की पक्की रसीद हो गए/सवा अरब देशवासियों की  तिरंगी उम्मीद हो गए

देश रहे खुशहाल/मनाएं ईद, दीवाली हर साल/भारत मां के चरण चूमे औ, शहीद हो गए"

ख्याति लब्ध कवयित्री डॉ अनामिका जैन अम्बर ने कहा "जियो और जीने दो सबको जिनशासन का नारा है/जैन धरम के दीपक से ही दुनिया में उजियारा है/महावीर की करुणा का इस जग को मिला सहारा है/जैन धरम के दीपक से ही दुनिया में उजियारा है"

सूरत से आई कवयित्री सोनल जैन ने अपने अंदाज में कहा "हास परिहास रहे कोई न उदास रहे/इसलिए उर उपजायी गई कविता/हुस्न के रिसालों में गई है़ नहलाई और गजरे के फूलों से सजाई गई कविता/विरह की जिरह सुनी नहीं किसी ने तब आँसुओं की आग में तपाई गई कविता/जगत की पीर से कबीर हो उठा अधीर मुक्त कंठ होकर सुनाई गई कविता"

संचालन कर रहे क्रांति कवि सौरभ जैन सुमन ने बांग्लादेश में हो रहे हिंदू नरसंहार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा "हिंदू नरसंहार की हमको निंदा विंदा नहीं चाहिए/मुट्ठी भर के देश से भारत तो शर्मिंदा नहीं चाहिए/एक भी हिंदू बांग्लादेश में अब जो मारा जाए तो/एक भी बांग्लादेशी हिंद में हमको जिंदा नहीं चाहिए"

पूरे सदन में भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे गूंजने लगे। इसके बाद सौरभ सुमन ने कहा कि भारत सरकार ये बिल ला रही है कि अब जैसा सम्मान राष्ट्रगान को मिला एक्वा राष्ट्रगीत वन्देमातरम को मिले। उन्होंने अपनी कविता वन्देमातरम सुनाई। जिस पर तमाम श्रोताओं ने खड़े होकर तालिया बजकर अभिवादन किया।

स्टार पोएटस डॉ अनामिका जैन अम्बर ने समापन करते हुए अपनी कविताओं के साथ साथ गीत भी सुनाए। उनके गीत "राम भक्त ही राज करेगा दिल्ली के सिंहासन पर" पे श्रोताओं ने झूमकर नृत्य किया। देर रात तक कवि सम्मेलन चल। दिल्ली से आए हास्य कवि राजेश अग्रवाल, सरधना के संजय सत्यम ने भी काव्यपाठ किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ सोमेंद्र तोमर रहे। उन्होंने क्यों की कविता देश में जागरण का काम करती है। जब युद्ध क्षेत्र में योद्धा थक जय करते थे और अगले दिन युद्ध की हिम्मत नहीं रखते थे तब ये कविता ही थी जो उनमें ऊर्जा भारती थी। कविता केवल प्रेम या हास्य का पर्याय नहीं हैं वो देश के जागरण का काम भी करती हैं।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक समाज के अध्यक्ष पवन हैं ने कहा कि ये आयोजन नींव की ईंट जैसा सिद्ध हुआ है। इतनी देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखने की क्षमता केवल कविता में है।

वहीं सह संयोजक दीपक जैन ने सभी कवियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक अरिहंत ज्वैलर्स के  रितेश जैन सिद्धार्थ जैन रहे। वहीं अरिहंत जैन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

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