राष्ट्रीय सम्मेलन में लॉ कॉलेज में की गयी न्याय प्रणाली में हुए बड़े बदलावों पर चर्चा
आईआईएमटी विवि में नई आपराधिक विधि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
मेरठ । आईआईएमटी विवि के लॉ कॉलेज में नए क्रिमिनल कानूनों के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत एक बड़ा बदलाव विषय पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर के कानूनी विशेषज्ञों, तकनीकी विशेषज्ञों और न्यायिक विद्वानों ने शिरकत की, ताकि भारत की नई आपराधिक न्याय प्रणाली पर पड़ने वाले तकनीकी प्रभावों का विश्लेषण किया जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रोफेसर डॉ. राज कुमार उपाध्याय (मेरठ कॉलेज, मेरठ) ने अपने संबोधन में भारतीय कानूनी चेतना के डीकोलोनाइजेशन (वि-औपनिवेशीकरण) पर बल देते हुए कहा की आईपीसी से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में बदलाव सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है बल्कि यह एक वैचारिक पुनर्जन्म है। हम एक औपनिवेशिक सोच को ऐसे तंत्र से बदल रहे हैं जो दंड के बजाय न्याय के मूल्यों को प्राथमिकता देता है। हालांकि, जैसे ही हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस नए ढांचे में शामिल करते हैं, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एल्गोरिदम हमेशा वकील का सहायक बना रहे, उसका स्वामी नहीं।
विशिष्ट अतिथि और प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर डॉ. जुबैर अहमद खान (यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज, नई दिल्ली) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरेंसिक डेटा को मानव मस्तिष्क से कहीं अधिक गति से संसाधित कर सकता है परंतु हमें ब्लैक-बॉक्स न्यायशास्त्र से सतर्क रहना चाहिए। हमारे जांच एल्गोरिदम में पारदर्शिता ही संवैधानिक मर्यादा और प्रोसीजरल ड्यू प्रोसेस को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है।
कॉन्फ्रेंस के तकनीकी सत्रों में प्रोफेसर डॉ. अनुराग दीप (दिल्ली विश्वविद्यालय), डॉ. राहुल भारती (गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस, महाराष्ट्र) और सुश्री प्रियंका मजूमदार (गुवाहाटी यूनिवर्सिटी) ने डिजिटल साक्ष्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उभरती चुनौतियों पर गहन विचार रखे।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 120 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ। समापन सत्र में वाणिज्य कर आयुक्त, सुश्री अनीता यादव ने अपने बहुमूल्य विचारों से इस सत्र को आलोकित किया।
कार्यक्रम के समापन भाषण में विभागाध्यक्ष डॉ. एहतेशामुद्दीन अंसारी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सेमिनार हॉल में उपस्थित एवं ऑनलाइन माध्यम से जुड़े समस्त विधिवेत्ताओं, प्रवक्ताओं, शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं के निरंतर जुड़ाव, विचार प्रस्तुति तथा शोध-पत्र प्रस्तुत कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने पर हर्ष व्यक्त किया। सम्मेलन के आयोजन पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता, प्रति कुलाधिपति डा. मयंक अग्रवाल, कुलपति डा. दीपा शर्मा, कुलसचिव डा. वीपी राकेश ने इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।


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