पाली: भारत की शास्त्रीय भाषा का वैभवपूर्ण वैश्विक मंच मेरठ में

मेरठ। सम्राट अशोक सुभारती स्कूल ऑफ़ बुद्धिस्ट स्टडीज़ (SASSBS), स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सलाहकार डॉ. हीरो हीतो ने एक उत्साहजनक घोषणा की है—एशिया की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने और पाली को वैश्विक विरासत भाषा बनाने की दिशा में दो दिवसीय भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 28-29 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा।

“पाली: भारत की शास्त्रीय भाषा—एशिया की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने तथा पाली को वैश्विक विरासत भाषा के रूप में भारत की भूमिका को आगे बढ़ाने की दिशा में”—यह शीर्षक वाला ऐतिहासिक आयोजन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के सहयोग से हो रहा है। डॉ. शाल्य राज,मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) तथा डॉ. पी. के. शर्मा, कुलपति के संरक्षण में यह सम्मेलन वैश्विक बौद्ध विद्वानों का संगम बनेगा।समापन सत्र में  जयवीर सिंह, उत्तर प्रदेश के  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री मुख्य अतिथि होंगे।

 डॉ. हीरो हीतो ने कहा, "मंत्री  की उपस्थिति उत्तर प्रदेश सरकार की बौद्ध धरोहर संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चरम पर है।" बौद्ध परिपथ का विकास—सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती जैसे स्थलों का सौंदर्यीकरण—उत्तर प्रदेश को वैश्विक तीर्थ बना रहा है।उद्घाटन सत्र में परम पूज्य थिच न्हात तु (स्टैंडिंग डिप्टी रेक्टर, वियतनाम बौद्ध विश्वविद्यालय, हो ची मिन्ह सिटी) और परम पूज्य अशिन कुमारा (प्रो-चांसलर, सितागु अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विश्वविद्यालय, म्यांमार) शीलन्यास करेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्राचीन ज्ञान परंपराओं के पुनरुत्थान दृष्टि से जुड़ा यह मंच पाली को शास्त्रीय भाषा के रूप में स्थापित करेगा।दोनों दिनों में हाइब्रिड मोड से 98 शोधपत्र प्रस्तुत होंगे—पाली साहित्य, बौद्ध दर्शन, सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित। भारत के अलावा कनाडा, यूके, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम, भूटान, नेपाल, नीदरलैंड्स से विद्वान, भिक्षु पहुंचेंगे। डॉ. हीरो हीतो बोले, "यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध केंद्र बनाएगा!"क्या आप इस न्यूज़ स्टोरी में कोई अतिरिक्त विवरण जोड़ना चाहेंगे या टोन को और अधिक औपचारिक/संक्षिप्त बनाना पसंद करेंगे।

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