एडीजी और आईजी के आदेश के बावजूद कोर्ट भेजी एफआर

मेरठ | हरिओम आनंद सुसाइड मामले में जांच ट्रांसफर के एडीजी और आईजी के आदेश के बावजूद मेरठ पुलिस ने एफआर कोर्ट भेज दी। इस एफआर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। एफआर अभी कोर्ट में स्वीकृत नहीं हुई है। इस मामले में जहां एक ओर जांच अधिकारी से लेकर क्राइम ब्रांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। वहीं दूसरी ओर, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि साक्ष्य जुटाने की जगह क्राइम ब्रांच टीम ने इस मामले में साक्ष्य अभाव का हवाला देकर एफआर लगा दी है।
आनंद अस्पताल के मालिक हरिओम आनंद ने 27 जून 2020 को मुरलीपुर स्थित फार्महाउस पर जहरीले पदार्थ का सेवन किया था। हरिओम आनंद की बेटी मानसी आनंद ने तहरीर दी थी, जिसमें सुभारती ट्रस्ट चेयरमैन डॉ. अतुल कृष्ण, उनकी पत्नी डॉ. मुक्ति भटनागर, आनंद अस्पताल के शेयरधारकों जीएस सेठी, ललित भारद्वाज, राहुल दास, मुमताज, समयसिंह सैनी और नौ अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत कई धाराओं में मुकदमा नौचंदी थाने में कराया गया था। जांच के लिए एसपी क्राइम रामअर्ज के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया, जिसमें क्राइम ब्रांच प्रभारी वरुण शर्मा और सीओ का शामिल किया गया। जांच में साक्ष्य संकलन के दौरान लापरवाही बरती गई और एफआर की तैयारी कर ली गई।
आदेश के बावजूद एफआर भेजी कोर्ट
इस प्रकरण में मुकदमे की वादी मानसी आनंद ने एडीजी राजीव सबरवाल से शिकायत की थी। आईजी मेरठ प्रवीण कुमार को कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया था। मंगलवार को जांच हापुड़ एसपी नीरज जादौन को ट्रांसफर कर दी गई। इस आदेश के बावजूद मेरठ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एफआर बुधवार को कोर्ट भेज दी।
साक्ष्य संकलन में लापरवाही
मानसी आनंद के वकील रामकुमार शर्मा का आरोप है कि पुलिस ने आरोपी पक्ष से साज कर एफआर लगाई है। पुलिस ने साक्ष्य संकलन नहीं किए। कई बिंदुओं को नजरअंदाज किया। जब कुछ लोग शेयरधारक हैं तो वह किस आधार पर हरिओम आनंद से पैसा वसूल रहे थे।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts