पाबंदियों के बाद भी फर्क नहीं
इलमा  अज़ीम
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक ऐसी समस्या बन गई है, जिसके समाधान के लिए अपनाए जा रहे तमाम उपाय कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। हर साल सर्दी के मौसम में यहां की हवा में सांस लेना जोखिम भरा हो जाता है। कई बार तो वायु गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच जाती है। सरकार की ओर से प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए विशेष नीतियां और नियम बनाए गए हैं, जिन्हें परिस्थितियों की लिहाज से सख्त करने के प्रयास भी होते रहे हैं। इनमें निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध, वाहनों पर पाबंदियां, सड़कों पर पानी का छिड़काव और आसपास के राज्यों में पराली जलाने पर रोक लगाने के उपाय प्रमुख हैं।

 मगर इस सबके बावजूद यहां की हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। पंजाब में पराली जलाने की 700 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। इसे लेकर 24 एफआईआर दर्ज की गई है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाए जाने की 700 से ज्यादा घटनाओं को लेकर 24 एफआईआर दर्ज की गई हैं। अधिकारियों की ओर से बताया गया, "पंजाब में धान की कटाई के मौसम के बीच पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए मॉनिटरिंग और कार्रवाई चल रही है।"

 पीपीसीबी की मंगलवार तक की जिलेवार रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की कुल 717 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से, अधिकारियों ने 664 जगहों का निरीक्षण किया और 313 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में तरनतारन जिले में सबसे अधिक 318 मामले सामने आए। इस जिले में 299 जगहों का निरीक्षण किया गया और 152 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई। 

दिल्ली में वर्ष 2022 में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) में संशोधन के बाद पिछले चार साल में सर्दी के दौरान वायु गुणवत्ता में सतत सुधार नहीं हुआ है। इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके मूल कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत अध्ययन और उसके नतीजों के अनुरूप कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। सवाल है कि जब इन ज्ञात कारणों के अध्ययन के बाद ही दिल्ली में ग्रैप की व्यवस्था लागू की गई है और पौसी राज्यों में पराली जलाने पर रोक लगाने को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं, तो फिर क्या वजह है कि स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। जाहिर है कि प्रदूषण किसी एक शहर या राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रहता, इसलिए इसका समाधान भी सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। इसके लिए राजनीति से ऊपर उठकर विभिन्न राज्यों और सरकारी विभागों के बीच आपसी समझ एवं समन्वय का होना बेहद जरूरी है।

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